भारत की ‘हलवा सेरेमनी’ जैसी है कनाडा की यह अनोखी परंपरा; बजट के दिन वित्त मंत्री के जूतों से तय होता है देश का आर्थिक भविष्य और सरकारी नीतियों का संकेत

ओटावा/नई दिल्ली | दुनिया भर में बजट पेश करने के कई दिलचस्प तरीके हैं, लेकिन कनाडा की ‘बजट शूज’ परंपरा सबसे अनूठी है। यहाँ बजट भाषण से पहले वित्त मंत्री के लिए नए जूते खरीदना एक अनिवार्य रिवाज माना जाता है। इस परंपरा की शुरुआत 1954 में तत्कालीन वित्त मंत्री वॉल्टर हैरिस ने की थी। मजेदार बात यह है कि कनाडा की जनता वित्त मंत्री के जूतों की चमक और प्रकार देखकर ही बजट की प्रकृति का अंदाजा लगा लेती है। उदाहरण के तौर पर, यदि मंत्री चमकदार लेदर शूज पहनते हैं, तो इसे व्यापार समर्थक बजट माना जाता है, जबकि साधारण जूते खर्चों में कटौती का संकेत देते हैं।

कनाडा के राजनीतिक इतिहास में वित्त मंत्रियों ने अपने जूतों के जरिए कई बड़े संदेश दिए हैं। साल 2015 में वित्त मंत्री जो ओलिवर ने ‘न्यू बैलेंस’ ब्रांड के रनिंग शूज पहनकर यह संकेत दिया था कि वे बजट को पूरी तरह संतुलित (Balance) करने वाले हैं। वहीं, 2011 में जिम फ्लैहर्टी ने नए जूते खरीदने के बजाय पुराने जूतों में ही नया ‘सोल’ लगवाया था, जिसका अर्थ था कि सरकार अपनी पुरानी नीतियों को ही मजबूती से आगे बढ़ाएगी। कभी-कभी मंत्री मजदूरों वाले मजबूत बूट्स पहनकर भी आते हैं, जो बुनियादी ढांचे और निर्माण क्षेत्र पर सरकार के भारी निवेश का प्रतीक होता है।

हालांकि यह रस्म दशकों से चली आ रही है, लेकिन समय-समय पर इसकी आलोचना भी होती है। महंगाई और आर्थिक तंगी के दौर में नए जूते खरीदना कुछ लोगों को जनता के साथ मजाक लगता है। इसी विरोध से बचने के लिए आधुनिक दौर में वित्त मंत्री अक्सर किसी स्थानीय कनाडाई ब्रांड के साधारण जूते चुनते हैं, ताकि ‘स्वदेशी’ और ‘बचत’ का संदेश दिया जा सके। भारत में जिस तरह बजट छपने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बांटा जाता है, ठीक उसी तरह कनाडा में यह ‘फुटवियर डिप्लोमेसी’ बजट सत्र का सबसे प्रतीक्षित और चर्चा का विषय बनी रहती है।

Next Post

ईरान में प्रदर्शनों के दौरान मौतों का पहली बार आया आधिकारिक आंकड़ा; खामेनेई सरकार ने स्वीकार की 3,117 मौतें

Thu Jan 22 , 2026
तेहरान/वाशिंगटन | ईरान सरकार ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक की है। ईरानी गृह मंत्रालय और ‘शहीद फाउंडेशन’ के अनुसार, 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक कुल 3,117 लोगों की जान गई है। सरकारी […]

You May Like