भोपाल। गौमांस से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी असलम के कार्यों को लेकर अब वन विहार में मांस आपूर्ति व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. जानकारी के अनुसार असलम के पास वन विहार में वन्य प्राणियों के लिए मांस आपूर्ति का ठेका था. इसके साथ ही उसके पास नगर निगम के अंतर्गत शहर में मृत पशुओं को उठाकर उनका निस्तारण करने का भी ठेका बताया जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, इसी आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि क्या मृत पशुओं के निस्तारण की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई. हालांकि, इस संबंध में फिलहाल किसी भी जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
आदमपुर खंती में होता है मृत पशुओं का निस्तारण
नगर निगम द्वारा मृत पशुओं के निस्तारण के लिए आदमपुर खंती में स्थल निर्धारित है. नियमों के अनुसार गायों का दाह संस्कार किया जाता है, जबकि अन्य पशुओं को दफनाया जाता है. आरोपों के बीच यह बिंदु भी जांच के दायरे में है कि क्या सभी पशुओं का निस्तारण नियमानुसार किया गया.
वन विहार में मांस की दैनिक आवश्यकता
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वर्तमान में कुल 32 मांसाहारी वन्य प्राणी हैं, जिनमें 13 बाघ, 18 तेंदुए और एक लकड़बग्घा शामिल है. इन जानवरों के लिए प्रतिदिन औसतन लगभग 250 किलोग्राम मांस की आवश्यकता होती है. जानवरों की उम्र और वजन के अनुसार उन्हें 4 से 10 किलोग्राम तक मांस दिया जाता है.
आरोपों के बाद मांस आपूर्ति बंद
गौमांस से जुड़ा मामला सामने आने के बाद वन विहार को की जा रही मांस आपूर्ति को फिलहाल बंद कर दिया गया है. यह भी बताया जा रहा है कि पूर्व में मांस आपूर्ति स्लॉटर हाउस से चिकित्सकीय जांच के बाद की जाती थी.
वन विहार प्रबंधन का पक्ष
वन विहार के डायरेक्टर विजय सुन्दा ने बताया कि स्लॉटर हाउस के डॉक्टर की रिपोर्ट में भैंस का मांस प्रमाणित होने के बाद ही उसे वन्य प्राणियों के लिए स्वीकार किया जाता था. यह कहना कठिन है कि जब्त मांस मृत या जीवित पशु का था या किस प्रजाति का था. मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं.
इधर,आदमपुर खंती में तैनात नगर निगम कर्मचारी रामरतन लोहिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इस संबंध में नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.
