तमिलनाडु के राज्यपाल ने फिर सदन से किया बर्हिगमन, नये साल का पारंपरिक भाषण नहीं दिया

चेन्नई, 20 जनवरी (वार्ता) सत्ताधारी द्रमुक के साथ चल रहे तकरार के बीच तमिलनाडु विधानसभा के नये साल का सत्र मंगलवार को हंगामेदार तरीके से शुरू हुआ। राष्ट्रगान न गाये जाने पर राज्यपाल आर एन रवि ने एक बार फिर अपना पारंपरिक संबोधन छोड़ दिया और ‘बर्हिगमन ‘ कर गये।

राज भवन से बाद में जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि राज्यपाल ने अपना संबोधन इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि इसमें कई अप्रमाणित और भ्रामक दावे थे और कई गंभीर सार्वजनिक मुद्दों की उपेक्षा की गयी थी। जब वह सत्र के लिए राज्य सचिवालय पहुंचे तो राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत हुआ और अध्यक्ष एम अप्पावु और विधान सभा सचिव एम श्रीनिवासन ने शॉल और गुलदस्ता भेंटकर उनका स्वागत किया।

विधानसभा अध्यक्ष के आसन संभालने के बाद मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, मंत्रियों, विपक्ष के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी और दूसरे सदस्यों से ‘तमिल थाई वाज्थु’ (मां तमिल की स्तुति) के बाद, राज्यपाल अपना भाषण देने के लिए खड़े हुए। तैयार अभिभाषण पढ़ने के बजाय उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान नहीं गाया गया और ‘गुस्से’ में वह सदन से बाहर चले गये।

यह लगातार चौथा वर्ष था, जब राज्यपाल ने ऐसा कदम उठाया है। वर्ष 2023 में अपने अभिभाषण में ‘द्रविड़म’ शब्द और अन्य नेताओं के संदर्भों को छोड़ने के बाद उन्होंने 2024 और 2025 में भी अपने अभिभाषण की शुरुआत से पहले राष्ट्रगान न गाये जाने का हवाला देते हुए सदन से वॉक आउट किया था। इसके बाद से सरकार और राज भवन के बीच ‘शीतयुद्ध’ की स्थिति बनी हुई है।

श्री स्टालिन ने बाद में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि सरकार की ओर से तैयार अभिभाषण ही विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए और इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद अध्यक्ष ने अभिभाषण का तमिल संस्करण पढ़कर सुनाया और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।

तमिलनाडु के विधि मंत्री एस रघुपति ने बाद में विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा है कि सत्र की शुरुआत में ‘तमिल थाई वाज्थु’ गाया जाता है और राष्ट्रीय गान को दिन के सत्र के अंत में गाया जाता है।

इस परंपरा की बार-बार याद दिलाये जाने के बावजूद राज्यपाल पारंपरिक संबोधन दिए बिना विधानसभा से बाहर निकल गये और बाद में राज भवन ने स्पष्टीकरण बयान जारी किया।

मंत्री ने राज्यपाल के उस आरोप को भी खारिज कर दिया और निराधार बताया कि जब उन्होंने अपना संबोधन पढ़ना शुरू किया तो माइक बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “केवल राज्यपाल ही जानते हैं कि उन्होंने अपना संबोधन फिर से छोड़ने का फैसला क्यों किया।” राज्यपाल के सदन से बाहर निकलने के ठीक बाद राज भवन ने बयान जारी किया है जिसका अर्थ है कि यह पूर्व-नियोजित था और राज भवन को यह तथ्य भली भांति पता था कि श्री रवि अपना संबोधन छोड़ देंगे।

ध्यान देने योग्य है कि गवर्नर ने केवल 2022 में संबोधन का पूरा पाठ पढ़ा था।

 

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