पुलिस के पास आ गई चलती-फिरती फोरेंसिक लैब

ग्वालियर। पुलिस के खाते में एक मोबाइल फोरेंसिक लैब आ गई है। दरअसल यह चलती-फिरती फोरेंसिक लैब है जो किसी भी अहम घटना के बाद मौके पर पहुंचकर पुलिस की मदद करने में जुट जाएगी। उन सैंपल की मौके पर ही जांच करना शुरु कर देगी जिन सैंपल को लेकर पुलिस वालों को अभी तक घटना स्थल से फोरेंसिक लैब की ओर दौड़ना पड़ता था। उम्मीद की जा रही है कि इससे क्राइम डिटेक्शन में मदद मिलेगी और पुलिस का कीमती समय भी काफी बचेगा।

पुलिस को यह मोबाइल फोरेंसिक लैब पुलिस के आधुनिकीकरण प्रोग्राम के तहत मिली है। पुलिस मुख्यालय ने तय किया है कि प्रदेश के सभी अहम जिलों में ऐसी लैब पहुंचा दी जाएं जो खुद ही घटना स्थल पर पहुंचकर पुलिस का काम हल्का कर सकें। अभी इस तरह की लैब प्रदेश के प्रमुख शहरों की पुलिस के सुपुर्द की गई है और धीरे-धीरे इस सेवा का विस्तार प्रदेश के सभी जिलों में किया जाएगा।

यह मोबाइल लैब पुलिस की फोरेंसिक विंग के अधीन रहेगी। इसमें पुलिस की फोरेंसिक की टीम रहेगी जो किसी भी घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर पुलिस तुरंत अपना काम करना शुरु कर देगी। इसमें ब्लड का सैंपल टेस्ट करने की भी सुविधा है तो फिंगर प्रिंट को आसानी से सहेजने की भी व्यवस्था है।

*असर क्या होगा*

घटना स्थल पर ही सैंपल की जांच होगी इससे पुलिस की दौड़-भाग कम होगी पुलिस विवेचना को रफ्तार मिलेगी

*अब क्या होगा*

इस मामले में पुलिस कप्तान धर्मवीर सिंह ने कहा कि यह चलती-फिरती फोरेंसिक लैब मौके ही वो सभी काम करने लगेगी जिसके लिए अभी तक पुलिस फोर्स को सैंपल लेकर फोरेंसिक लैब दौड़ना पड़ता था। सैंपल जमा करना होता था और रिपोर्ट का इंतजार करना होता था। इससे काम में तेजी आएगी। यदि खून का साक्ष्य मौके पर मिला है तो तुरंत पता लग सकेगा कि खून इंसान का है या जानवर का।

*अभी क्या होता था*

किसी भी अहम घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को सबसे पहले घटना स्थल पर बिखरे साक्ष्य समेटने होते थे। इसमें कई पुलिस वालों को एक साथ लगना पड़ता था और कई बार इसी क्रम में साक्ष्य भी प्रभावित हो जाते थे क्योंकि हर पुलिस कर्मी साक्ष्य एकत्र करने में महारथ नहीं रखता।

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