
भोपाल। भारत भवन का आंगन महाभारत के कालखंड में बदल गया. जब शाम 7 बजकर 22 मिनट पर सात मंचों पर एक ही समय में चल रही प्रस्तुति ने दर्शकों को मानो हजारों वर्ष पहले की कथा में पहुंचा दिया. पहले दिन की यह शुरुआत ऊर्जा, भव्यता और इण्डोनेशिया के प्रतिष्ठित नाट्य समूह द्वारा प्रस्तुत भीष्म का पतन नृत्य नाटिका और कर्मचक्र की गाथा की अद्वितीय प्रस्तुति के संगम से हुई।
–7 मंचों पर एक साथ जीवंत हुआ इतिहास–
कार्यक्रम में 100 से अधिक कलाकारों ने महाकाव्य के आरंभिक स्वरूप को नृत्य नाटिका के माध्यम से दर्शाया. प्रस्तुति में वेदव्यास द्वारा गणेश को महाभारत लिखने के आदेश से लेकर धृतराष्ट्र की पीड़ा तक की कथा बहती चली गई. धृतराष्ट्र का यह भाव दर्शकों को भीतर तक छू गया कि अंधकार ही अब मेरा पथ है और यह मेरे कर्मों का परिणाम है. एक तरफ नृत्य की लय और अभिव्यक्ति के साथ वेदव्यास और गणेश के संवादों ने दर्शकों को कथा की जड़ से जोड़ा. वहीं दूसरी ओर मंचन में दिखाया गया कि महाभारत का युद्ध केवल संघर्ष नहीं बल्कि जन्म जन्मांतरों का फल है. शाम की प्रस्तुति ने स्पष्ट किया कि महाभारत केवल युद्ध कथा नहीं है. यह मनुष्य के कर्म, परिणाम और नैतिक संघर्षों की गाथा है.
–सजावट और दृश्य सौंदर्य ने बांधा मन–
कलाकारों की वेशभूषा, प्रकाश का संयोजन, और मंचों की भव्य सजावट ने पूरा परिसर कथा के दृश्य संसार में बदल दिया. भवन के प्रवेश द्वार से लेकर प्रस्तुति के मंचन तक सजा हर एक दृश्य दर्शकों को बस ठहर जाने को कह रहा था।
–भारत का पहला पौराणिक इमर्सिव डोम में दिखे विराट श्रीकृष्ण–
भारतीय कथाओं को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत करता हुआ देश के पहले इमर्सिव डोम का उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उद्घाटित किया. छह मिनट की इमर्सिव फिल्म में भागवत गीता के बारहवें अध्याय का सार दिखाया गया और समापन महामंत्रवत श्रीकृष्ण के विराट विश्वरूप दर्शन के साथ हुआ. यह डोम अमृत्य लोक टेल्स मुंबई की पहल पर तैयार किया गया है. इसमें रूप दिया गया है.
–तकनीक के साथ पुरातन का संगम–
360 डिग्री स्क्रीन और फर्श पर प्रसारित दृश्य सहित दर्शक बिना वीआर ग्लास पहने इसे अनुभव कर सकते हैं. इस अनूठे प्रयोग ने पौराणिक कथाओं को भविष्य की भाषा में पिरो दिया. इस डोम का निर्देशन और निर्माण नितांशी के गुप्ता, नितिन के गुप्ता और चिराग गुप्ता द्वारा किया गया है.
