अफगान तालिबान नेता ने इस्लामिक अमीरात में आंतरिक तनाव को बताया सबसे बड़ा खतरा

काबुल, 16 जनवरी (वार्ता) अफगान तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने चेतावनी दी है कि इस्लामिक अमीरात के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद हैं। इससे तालिबान नेतृत्व के अंदर गहराते तनाव के संकेत मिलते हैं।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा प्राप्त एक ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, श्री अखुंदज़ादा ने जनवरी 2025 में तालिबान अधिकारियों की एक बैठक में कहा था कि यदि आपसी खींचतान जारी रही तो “अमीरात ढह जाएगा।”

यह भाषण कंधार के एक जिहादी मदरसे में दिया गया था और इसे तालिबान प्रमुख द्वारा संगठन की एकता को लेकर असामान्य रूप से स्पष्ट स्वीकारोक्ति माना जा रहा है। तालिबान सार्वजनिक रूप से आंतरिक मतभेदों से इनकार करता रहा है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयान इसके विपरीत संकेत देते हैं। अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी ने हाल ही में खोस्त में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “डर और ताकत से चलाया गया शासन असली सरकार नहीं होता।”

उन्होंने तालिबान सदस्यों से एक-दूसरे को अपमानित या बदनाम न करने की अपील की और कहा कि प्रभावी शासन के लिए जनता और सत्ता के बीच भरोसा जरूरी है। उनके इस बयान को तालिबान की सख्त और दमनकारी कार्यप्रणाली पर परोक्ष आलोचना के रूप में देखा गया। इसके अगले दिन श्री अखुंदज़ादा के करीबी सहयोगी श्री नेदा मोहम्मद नदीम ने असहमति के स्वर पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमीर की अवज्ञा से व्यवस्था कमजोर होगी। श्री नदीम ने जोर देकर कहा कि एक इस्लामिक राज्य में केवल एक ही नेता हो सकता है और “कई अमीरों” का उभरना भ्रष्टाचार और विफलता को जन्म देगा। इससे कंधार नेतृत्व की निर्विवाद निष्ठा की मांग फिर सामने आई।

अक्टूबर 2025 में सत्ता के प्रतिद्वंद्वी केंद्रों के बीच तनाव खुलकर सामने आया, जब सूत्रों के अनुसार श्री अखुंदज़ादा ने देशभर में इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया। इस फैसले से सार्वजनिक सेवाएं और तालिबान के दफ्तर ठप हो गए। काबुल स्थित मंत्रियों के दबाव के बीच प्रधानमंत्री हसन अखुंद ने 48 घंटे बाद, इंटरनेट बहाल करने का आदेश दिया। एक सूत्र ने इसे काबुल और कंधार नेतृत्व के बीच सीधा टकराव बताया। बाद में बीबीसी की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि सीमित अंतरराष्ट्रीय संपर्क के पक्षधर मंत्रियों की लगातार पैरवी के बाद यह फैसला पलटा गया।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के भीतर दो धड़े उभरकर सामने आए हैं-एक काबुल आधारित समूह, जो व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों और प्रशासनिक कार्यक्षमता का पक्षधर है, और दूसरा कंधार आधारित धड़ा, जो श्री अखुंदज़ादा के नेतृत्व में अलगाव की नीति को तरजीह देता है। दोनों ही इस्लामी कानून के सख्त पालन के समर्थक हैं, लेकिन शासन और विदेश नीति को लेकर उनके विचारों में गहरा अंतर है। बीबीसी ने कहा कि अक्टूबर का इंटरनेट बंद करने का फैसला उसी खतरे को दर्शाता है, जिसकी चेतावनी श्री अखुंदज़ादा ने महीनों पहले दी थी-आंतरिक तत्वों द्वारा एकता को कमजोर किया जाना।

तालिबान प्रमुख अखुंदज़ादा स्वयं एक रहस्यमयी और एकांतप्रिय शख्सियत बने हुए हैं। उनसे मिलने वालों के अनुसार, वह बहुत कम बोलते हैं और अक्सर इशारों के माध्यम से संवाद करते हैं, जिनकी व्याख्या वरिष्ठ मौलवी करते हैं। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी चेहरा, यहां तक कि आंखें तक ढके रखते हैं, फोटोग्राफी पर प्रतिबंध है और बहुत सीमित लोगों को मुलाकात की अनुमति देते हैं। अब तक उनकी केवल दो तस्वीरें ही सार्वजनिक हुई हैं।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने अपनी 15 जनवरी को प्रकाशित रिपोर्ट के लिए करीब 100 मौजूदा और पूर्व तालिबान सदस्यों, विश्लेषकों और राजनयिकों से बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान अब सत्ता पर कब्जे से ज्यादा उसे एकजुट बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहा है।

 

 

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