जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने नाले के गंदे व विषैले पानी से सब्जी उगाने के मामले को सख्ती से लिया। मामले पर सुनवाई के दौरान मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नालों के पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिलता है, जिस कारण वह अत्यंत दूषित है। यह पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णत: अनुपयोगी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को कहा कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल अमल करके रिपोर्ट पेश करें। मामले पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को नियत की गई है।
जबलपुर में 174 मेगालीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है। न्यायालय को बताया गया कि प्लांट्स की कुल क्षमता 154.38 मेगालीटर प्रतिदिन की है। इसके लिए समय-समय पर करोड़ों रुपए की राशि का आवंटन भी किया गया है। हाल ही में नगर निगम जबलपुर को अमृत 2.0 सीवर योजना अंतर्गत 1202.38 करोड़ राशि स्वीकृत हुई है। मामले में प्रदूषण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य नालों से पानी का सेंपल लेकर जांच की थी।
जांच के बाद इनके पानी में बीओडी, टोटल कोलिफॅर्म या फेकल कोलिफॅर्म की मात्रा निर्धारित मानक सीमा से अधिक है। नमूना रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट है कि यह अनुपचारित सीवर का जल है जो पीने, नहाने या खेती सहित किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। डेमोक्रेटिक लॉयर फोरम की ओर से रविंद्र गुप्ता द्वारा शीघ्र ही सही साफ और बिना संक्रमित पानी पीने लायक घरों में सप्लाई करने हेतु नगर निगम सक्षम नहीं है इसलिए संपूर्ण मामले की पर सही कार्रवाई हेतु एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की मांग की है। जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि हाईकोर्ट जज रिटायर्ड की चेयरमैनशिप के अंदर में जबलपुर मेयर जबलपुर कमिश्नर जबलपुर कलेक्टर एचपी डिपार्टमेंट के हेड किसी सीनियर सिटीजन सोशल वर्कर और किसी सीनियर एडवोकेट ऐसे साथ लोगों की मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए जिस पर न्यायालय ने कहा कि आगे नोटिस के पश्चात इस पर सुनवाई की जाएगी और इस आवेदन को अभी लंबित रखा गया है।
