1500 कर्मचारियों की नहीं हुई पहचान, ई अटेंडैंस व्यवस्था से रहे गायब

जबलपुर: नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर करीब एक से डेढ करोड़ रुपए का बंटबबांट कर दिया गया है। इस बड़े भ्रष्टाचार में कौन कौन शामिल हैं, उनसे रिकवरी कैसे होगी ये आगे की निगम प्रशासन की कार्रवाई तय करेगी। पूरा खुलासा उस वक्त हो गया जब निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार द्वारा विगत 1 सितंबर से चेहरा पहचान ई अटेंडैंस व्यवस्था लागू की और सख्त निर्देश दिए कि जो भी आउटसोर्स कर्मचारी जहां ड्यूटी कर रहा है वो अपनी हाजिरी ई अटेंडैंस के जरिए लगाएगा और निगम में अपनी पहचान दर्ज कराएगा।

जो ऐसा नहीं करेगा उसका वेतन नहीं बनेगा। जानकारी के अनुसार 1 सितंबर से दिसंबर माह तक 7200 पंजीकृत अधिकारी-कर्मचारियों में से कुल 5700 ने ही ई अटेंडैंस में अपनी-अपनी हाजिरी लगाई और 1500 कर्मचारी इस व्यवस्था से गायब रहे। मतलब साफ था कि इसके पहले ठेकेदारों व अधिकारियों की मिलीभगत से नगर निगम का खजाना इन कर्मचारियों के वेतन भुगतान से खाली कराया जा रहा था जबकि ये कहां नौकरी करते हैं ये किसी को नहीं पता था, बस कागजों में इनका जिक्र था।
स्थापना शाखा में दर्ज हैं 7200 कर्मचारी
विदित हो कि नगर निगम के स्थापना विभाग में कुल 7200 कर्मचारी पंजीकृत हैं जिनमें करीब 4500 आउटसोर्स कर्मचारी हैं और वहीं नियमित व संविदा कर्मचारियों की संख्या 2504 है। जानकारों का कहना है कि यदि 500 निगम के कर्मचारी किसी कारणवश ई अटेंडैंस नहीं लगाए पाए हों तो लेकिन फिर भी 1 हजार बचे कर्मचारियों का आंकड़ा तमाम सवाल खड़े कर रहा है

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