पूर्व सैनिक राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत: राजनाथ

नयी दिल्ली 14 जनवरी (वार्ता ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और समर्पित सेवा को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया है। श्री सिंह ने गुरुवार को यहां 10 वें सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिक दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस मौके पर रैलियां, पुष्पांजलि अर्पण समारोह, शिकायत निवारण काउंटर तथा सहायता एवं सुविधा डेस्क लगाये गये। मुख्य समारोह दिल्ली छावनी के मानेकशॉ सेंटर में हुआ जिसमें दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लगभग 2500 पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और समर्पित सेवा को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से युवाओं का मार्गदर्शन करने, अग्निवीरों और युवा सैनिकों को सही दिशा देने, आपात स्थितियों में नागरिक प्रशासन का सहयोग करने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। श्री सिंह ने कहा कि भारत तेजी से सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है और ऐसे समय में पूर्व सैनिकों का अनुभव, नेतृत्व और मूल्य देश के लिए अमूल्य संपत्ति हैं। उन्होंने ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों को भी याद किया और कहा कि उनके साहस और बलिदान को पहले वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय शांति सेना के सैनिकों के योगदान को खुले तौर पर स्वीकार किया है तथा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक सहित विभिन्न स्तरों पर उन्हें सम्मान दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए एक रैंक एक पेंशन, भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के सुदृढ़ीकरण, दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और टेलीमेडिसिन को बढ़ावा देने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व सैनिकों का जीवन गरिमा और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण हो। इसके लिए कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता, आवास, ऋण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा ,” सैनिक कभी वास्तव में सेवानिवृत्त नहीं होता। वर्दी का रंग बदल सकता है, कार्यस्थल बदल सकता है, लेकिन देशभक्ति और सेवा की भावना हमेशा बनी रहती है। सैनिकों और पूर्व सैनिकों का सम्मान हमारी नैतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।”
इस अवसर पर पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी ने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के अदम्य साहस को नमन किया। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र और उसके सैनिकों के बीच आजीवन बने रहने वाले संबंध की याद दिलाने का अवसर है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 60,000 सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे देश में पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग 35 लाख हो जाती है, और यह राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है कि उन्हें सम्मान, गरिमा और आत्मसम्मान के साथ जीवनयापन सुनिश्चित किया जाए।

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