नई दिल्ली | 14 जनवरी, 2026: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी बुधवार को बीजिंग पहुंचे हैं, जो पिछले कई वर्षों में किसी कनाडाई राष्ट्राध्यक्ष का पहला बड़ा आधिकारिक चीन दौरा है। इस यात्रा को चीन और कनाडा के बीच जमे हुए कूटनीतिक रिश्तों को पिघलाने और अमेरिका के प्रभाव से दूरी बनाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। चीन की सरकारी मीडिया ने कनाडा को सलाह दी है कि वह वाशिंगटन के पीछे चलने के बजाय अपनी विदेश नीति में ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ अपनाए। बीजिंग का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में जस्टिन ट्रूडो सरकार की अमेरिका-समर्थित नीतियों के कारण ही दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट आई थी।
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, अमेरिका द्वारा कनाडाई उत्पादों पर टैरिफ लगाने और डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद बयानों ने ओटावा को अपनी व्यापारिक रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जो पिछले साल ही सत्ता में आए हैं, इस दौरे को पूरी तरह से व्यापार केंद्रित बता रहे हैं। उनका उद्देश्य कनाडा की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी बाजार पर अत्यधिक निर्भरता से बचाना और नए अंतरराष्ट्रीय साझेदार तलाशना है। कनाडा अब चीन जैसे बड़े बाजार के साथ व्यापारिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिकी राजनीतिक दबाव का उस पर कम असर पड़े।
चीन और कनाडा के बीच 2018 से ही तनाव बना हुआ था, जब एक चीनी टेक अधिकारी की गिरफ्तारी हुई थी और बाद में दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामानों पर भारी टैरिफ लगाए थे। कार्नी का यह दौरा 17 जनवरी तक चलेगा, जिसमें वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ऊर्जा, कृषि और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि इस यात्रा से व्यापारिक समझौतों में प्रगति तो होगी, लेकिन टैरिफ को पूरी तरह से हटाना फिलहाल एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। यह दौरा वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन के बदलते स्वरूप का स्पष्ट संकेत है।

