
जबलपुर। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतिका के शरीर में सात चोटों के निशान थे। जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपी ने हत्या के इरादे से हमला किया था। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन ने पत्नी के हत्या के आरोप में पति को मिली आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।
उमरिया निवासी शंकर बैगा की तरफ से पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। अपील में कहा गया था कि बैगा समुदाय से है और आदिवासी वर्ग शराब का सेवन करता है। उसने तथा उसकी पत्नी सुखबंती ने 14 जनवरी 2019 को साथ में शराब का सेवन किया था। इस दौरान किसी बात पर विवाद होने के कारण उसने पत्नी के साथ डंडे से मारपीट की थी। पत्नी की दो दिन बाद 16 जनवरी को मौत हो गयी थी। पाली पुलिस ने मर्ग जांच के बाद उसके खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया था।
अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि घटना के समय वह नशे में था और घटना के नतीजे को समझने की स्थिति में नहीं था। उसका इरादा पत्नी की हत्या करने का नहीं था। पत्नी भी नशे में होने के कारण गिर गयी थी, जिसके कारण उसके सिर में चोट आई थी। वारदात में उसने किसी घातक हथियार से हमला नहीं किया था और सिर्फ डंडे से मारा था। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड के अनुसार अपीलकर्ता जब अपनी पत्नी को मार रहा था, तब पडोस में रहने वाली उसकी मॉ बीच बचाव करने आई थी। अपीलकर्ता ने भी मारने की धमकी देते हुए एक थप्पड़ मारा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख नहीं है कि मृतिका नशे में थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार महिला के शरीर में चोट के साथ निशान पाये गये है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अपील ख़ारिज कर दी।
