‘जन नायकन’ की रिलीज पर रोक लगाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (वार्ता) अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माताओं ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय की प्रथम पीठ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र देने का निर्देश देने वाले एकल पीठ के अपने ही आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इसका प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए टल गया। तमिल फिल्म ‘जन नायकन’ को सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार प्रोडक्शन हाउस ने उच्चतम न्यायालय से इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की है और अनुरोध किया है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुना जाए। कानूनी विवाद तब शुरू हुआ था, जब सीबीएफसी ने समय पर सेंसर प्रमाणपत्र जारी नहीं किया और इसे समीक्षा समिति के पास भेज दिया था।

इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने प्रस्तावित रिलीज से कुछ दिन पहले 06 जनवरी को मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया था। सुनवाई के दौरान सेंसर बोर्ड ने न्यायालय को बताया कि शिकायत मिली थी कि फिल्म के एक सीन में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला दृश्य है। इसके लिए और समीक्षा की जरूरत है। एकल पीठ ने कहा कि प्रमाणन प्रक्रिया शुरू होने के बाद बोर्ड का कोई सदस्य निजी तौर पर शिकायत कैसे दर्ज करा सकता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि निर्धारित प्रक्रिया से गुजर चुकी फिल्म की दोबारा जांच क्यों की गयी। एकल पीठ ने 9 जनवरी को आदेश दिया, “अध्यक्ष ने शक्ति का इस्तेमाल बिना अधिकार के किया है, क्योंकि अध्यक्ष की समीक्षा का आदेश देने का अधिकार तब खत्म हो गया था, जब समिति की ओर से उन्होंने जानकारी दी थी कि कुछ कट लगाने के बाद फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र दिया जायेगा। संशोधनात्मक शक्तियों का इस्तेमाल कर प्रक्रिया फिर से शुरू करने का उनके पास अधिकार नहीं था।” उन्होंने अपने आदेश में यह भी कहा था कि समिति के सदस्यों को अपनी स्थिति बदलने की अनुमति देने से ‘खतरनाक प्रवृत्ति’ का जन्म होगा और यह सीबीएफसी की प्रमाणन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करेगा।

सीबीएफसी ने मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली प्रथम पीठ के समक्ष इस आदेश को चुनौती दी। खंडपीठ ने फिल्म निर्माताओं से बिना प्रमाणन के रिलीज की तारीख की घोषणा करने पर सवाल उठाया और एकल न्यायाधीश के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
उच्च न्यायालय में इस फिल्म की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। अंतरिम रोक को चुनौती देते हुए निर्माताओं ने अब उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि एकल पीठ का आदेश कानूनी रूप से सही था और उच्च न्यायालय की रोक से फिल्म की रिलीज में देरी हो रही है और इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है।

Next Post

ग्रेटर नोएडा में 'विकसित भारत के लिए विकसित हॉस्पिटैलिटी' थीम पर होगा मिनी मैराथन

Mon Jan 12 , 2026
ग्रेटर नोएडा, 12 जनवरी (वार्ता) देश के आर्थिक विकास में आतिथ्य क्षेत्र के योगदान और इस उद्योग में करियर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्रेटर नोएडा में ‘विकसित भारत के लिए विकसित हॉस्पिटैलिटी’ थीम पर एक फरवरी को मिनी मैराथन का आयोजन किया जायेगा। यह आयोजन एफएचआरएआई-इंस्टीट्यूट […]

You May Like

Play sound