मनरेगा समाप्त कर गरीबों के रोजगार से खिलवाड़ : ज्ञान सिंह

सीधी।जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने जवाहर कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर गरीबों के रोजगार के अधिकार से खुला खिलवाड़ किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा की हत्या में पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य साजिशकर्ता हैं, जिन्होंने संसद में नया कानून पेश कर ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला किया है।

ज्ञान सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म कर उसकी जगह विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम 2025’ लागू करने की कड़े शब्दों में निंदा करती है। यह नया कानून मजदूर-विरोधी है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने का अपमान है। मनरेगा करोड़ों ग्रामीण मजदूरों की लाइफलाइन था, जिसे भाजपा सरकार ने छीनने का काम किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जो शिवराज सिंह चौहान खुद को मामा और गरीबों का हितैषी बताते हैं, वही संसद में इस विधेयक को पेश कर ग्रामीण गरीबों के काम के अधिकार को कुचलने का काम कर रहे हैं। संसद में मनरेगा में भ्रष्टाचार और कमियों का हवाला देना केवल बहाना है, जबकि सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार ने पिछले 11 वर्षों में जानबूझकर मनरेगा को कमजोर किया और अब उसे पूरी तरह समाप्त करने की साजिश रची गई है। नए कानून से मध्य प्रदेश के करीब 92 लाख सक्रिय मजदूरों की रोजी-रोटी केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गई है।

ज्ञान सिंह ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के केंद्रीय मंत्री बनते ही मनरेगा की हत्या होना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर उन्हें बेरोजगारी और असुरक्षा की ओर धकेलने वाला है।

उन्होंने कहा कि नए अधिनियम से मध्य प्रदेश पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए कहा कि नए कानून में फंडिंग पैटर्न 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकार पर 40 प्रतिशत खर्च का भार आएगा। इससे मध्य प्रदेश पर सालाना ₹5,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जबकि राज्य पहले से ही करीब ₹4 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा हुआ है। ज्ञान सिंह ने इसे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा राज्य के साथ किया गया वित्तीय धोखा बताया।

ई-केवाईसी और डिजिटल निष्कासन को लेकर भी कड़ा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में मनरेगा मजदूरों का 90.5 प्रतिशत ई-केवाईसी लंबित है, जो देश में सबसे अधिक है। आदिवासी बहुल जिलों झाबुआ, मंडला, डिंडोरी जैसे क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं का अभाव है, इसके बावजूद नए कानून में बायोमेट्रिक और डिजिटल सर्विलांस को अनिवार्य किया जा रहा है। इससे लाखों गरीब और आदिवासी मजदूर व्यवस्था से बाहर हो जाएंगे।

अंत में ज्ञान सिंह ने सवाल उठाया कि क्या यह फेडरलिज्म है या गरीबों को सजा देने की नीति? उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीबों, मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ेगी और मनरेगा को खत्म करने की इस साजिश का हर स्तर पर विरोध करेगी।

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