ग्वालियर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की एकल पीठ ने एसडीओपी रवि भदौरिया के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की तरफ से की गयी प्रतिकूल टिप्पणियों को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर या कलंकित करने वाली टिप्पणी करने से पूर्व उसे सुनवाई का मौका देना अनिवार्य है। बिना अवसर दिये की गयी टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकती है। याचिकाकर्ता रवि भदौरिया उस वक्त पुरानी इलाके में पदस्थ थे। उन्होने विशेष सत्र न्यायाधीश के 30 अगस्त 2025 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनोती दी थी। उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवकता एमपीएस रघुवंशी ने तर्क रखा था कि विशेष न्यायालय ने बिना कोई नोटिस दिये और बिना सुनवाई का मौका दिये गंभीर टिप्पणियां की। जिससे याचिकाकर्ता के सेवा-करियर पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ सकता था।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को मामले में केवल धारा 174 के तहत सीमित मर्ग जांच सौपी थी न कि पूर्ण आपराधिक जांच। इसके अलावा जिन तिथियों को लेकर निष्क्रियता का आरोप लगाया गया था। उस अवधि में याचिकाकर्ता का प्रकरण से संबंधित ही नहीं थे। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता को न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही उसे अपनी बात रखने का मौका दिया गया। जबकि ऐसी टिप्पणियों का सीधा असर अधिकारी के सेवा-करियर पर पड़ सकता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय के 30 अगस्त 2025 के आदेश के पैरा 60-62 में की गयी सभी प्रतिकूल टिप्पणियों को निरस्त कर दिया है।
