नई दिल्ली | 09 जनवरी, 2026: अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। लुटनिक के अनुसार, दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की रूपरेखा पूरी तरह तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे फोन पर बातचीत न करना इस समझौते के टूटने की मुख्य वजह बना। लुटनिक ने दावा किया कि अमेरिका अब उस तय समझौते से पूरी तरह पीछे हट गया है और उसने भारत के बजाय इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ व्यापारिक साझेदारियां कर ली हैं। उनके मुताबिक, यह कोई नीतिगत फैसला नहीं बल्कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच व्यक्तिगत संपर्क की कमी का नतीजा है।
वाणिज्य सचिव लुटनिक ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में राष्ट्रपति ट्रंप का ‘ईगो’ (अहंकार) आहत हुआ था। जब पीएम मोदी ने बातचीत के लिए संपर्क नहीं किया, तो इसका सीधा असर द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर पड़ा। ट्रंप ने प्रतिक्रिया स्वरूप भारत के खिलाफ टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की धमकी भी दी, जिससे भारतीय निर्यात क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा। लुटनिक ने बताया कि भारतीय अधिकारी अभी भी पुराने समझौते की याद दिलाते हैं, लेकिन अमेरिका ने अब उन शर्तों पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। यह बयान दर्शाता है कि वैश्विक व्यापारिक सौदों में व्यक्तिगत कूटनीति कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है।
यह पहली बार नहीं है जब हॉवर्ड लुटनिक ने भारत के प्रति सख्त रुख अपनाया हो। इससे पहले सितंबर 2025 में भी उन्होंने दावा किया था कि भारत को रूसी तेल की खरीद बंद करनी होगी और ट्रेड डील के लिए ट्रंप से माफी मांगनी होगी। हालांकि, भारत ने अपनी विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया, जिससे अमेरिकी प्रशासन में नाराजगी देखी जा रही है। वर्तमान में स्थिति यह है कि पहले से तय की गई रियायतें अब ठंडे बस्ते में चली गई हैं, जिससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

