नई दिल्ली | 07 जनवरी, 2026: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने जम्मू के रियासी जिले में स्थित ‘श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस’ की मान्यता तत्काल प्रभाव से वापस ले ली है। आयोग के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने निरीक्षण में पाया कि कॉलेज में बुनियादी ढांचे और फैकल्टी की भारी कमी है। रिपोर्ट के मुताबिक, टीचिंग फैकल्टी में 39% और रेजिडेंट डॉक्टरों के पदों पर 65% की कमी पाई गई। साथ ही, अस्पताल में मरीजों की संख्या और बेड ऑक्यूपेंसी भी निर्धारित मानकों से काफी नीचे थी, जिसके चलते छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा फैसला लिया गया।
यह संस्थान पिछले कई महीनों से एडमिशन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवादों के केंद्र में था। विवाद तब भड़का जब एमबीबीएस की 50 सीटों में से 42 पर मुस्लिम छात्रों और केवल 8 पर गैर-मुस्लिम छात्रों के चयन की सूची सामने आई। ‘श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति’ सहित दर्जनों हिंदू संगठनों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि भक्तों के दान से चलने वाले संस्थान में हिंदू छात्रों की अनदेखी की गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सुझाव दिया था कि राजनीति के बीच कॉलेज को बंद कर छात्रों को अन्यत्र शिफ्ट करना ही बेहतर होगा।
मान्यता रद्द होने के बाद अब कॉलेज में नामांकित छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी और मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में ‘सुपरन्यूमेरी’ सीटों पर शिफ्ट किया जाएगा। NMC ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी और रीलोकेशन की पूरी जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई है। हिंदू संगठन और संघर्ष समिति इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं प्रशासन अब माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के फंड के उपयोग और संस्थान की भविष्य की रूपरेखा पर नए सिरे से विचार कर रहा है।

