मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को लेकर दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को राज्य के बुनियादी ढांचे की दिशा और दृष्टि से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी कहा जा सकता है. केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं की उपस्थिति ने स्पष्ट संकेत दिया कि राजमार्ग विकास केवल निर्माण का कार्य नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ी एक दूरदर्शी प्रक्रिया है.दरअसल, सुरक्षित, सुगम और आधुनिक सडक़ अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति प्रदान करती है, क्योंकि सडक़ें ही उद्योग, निवेश, पर्यटन और रोज़गार सृजन की वास्तविक वाहक बनती हैं.
वर्तमान में प्रदेश में 61 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं क्रियान्वयन के चरण में हैं और 9,300 किलोमीटर से अधिक के सडक़ नेटवर्क के साथ मध्य प्रदेश कनेक्टिविटी के एक सशक्त मॉडल के रूप में उभरने की संभावना रखता है.
यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि योजनाएं घोषणा के समय तो उत्साहजनक प्रतीत होती हैं, परंतु ज़मीनी स्तर पर अड़चनों के चलते वर्षों तक अधूरी पड़ी रह जाती हैं. इस विलंब के कारण न केवल लागत में अनावश्यक वृद्धि होती है, बल्कि जनता के बीच शासन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं. इसलिए लंबित परियोजनाओं के लिए समन्वित निगरानी और समयबद्ध कार्ययोजना अब अनिवार्य हो चुकी है.जाहिर है राजमार्ग विस्तार की यह महत्वाकांक्षी पहल तभी सार्थक सिद्ध होगी, जब विकास की रफ्तार के साथ निर्माण गुणवत्ता को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी. दरअसल,सडक़ों का कुछ ही वर्षों में टूट जाना, वर्षा के दौरान धंसाव या व्यापक मरम्मत की आवश्यकता पडऩा केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग का संकेत भी है. यदि अधोसंरचनात्मक विस्तार केवल आंकड़ों में वृद्धि तक सीमित रह गया और गुणवत्ता मानकों का कठोर अनुपालन नहीं हुआ, तो यह विकास भार में बदल सकता है. साफ है कि निर्माण एजेंसियों की सख्त निगरानी, थर्ड-पार्टी गुणवत्ता ऑडिट और दोषपूर्ण निर्माण पर दंडात्मक कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं मजबूत और प्रभावी रूप में लागू करना होगी. इसी के साथ समय-सीमा का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है. अनेक परियोजनाएं वर्षों तक ‘निर्माणाधीन’ के बोर्ड के साथ टंगी रह जाती हैं और इस बीच उनकी अनुमानित लागत कई गुना बढ़ जाती है. अत: यह आवश्यक है कि प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय की जाए, प्रगति की नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग की जाए और देरी के लिए जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए. समयबद्धता केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि आर्थिक अनुशासन की भी कसौटी है.
राष्ट्रीय राजमार्ग किसी राज्य के लिए केवल डामर और कंक्रीट की पट्टियां नहीं होते, वे उसकी आर्थिक धमनियां होते हैं. वे गांवों को शहरों से, बाज़ार को उत्पादन से और नागरिकों को नए अवसरों से जोड़ते हैं. इस दृष्टि से मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार निस्संदेह स्वागत योग्य और दूरगामी प्रभाव वाला कदम है,बशर्ते गति के साथ गुणवत्ता, विस्तार के साथ जवाबदेही और निवेश के साथ जन विश्वास भी जुड़ा हो. यदि मध्य प्रदेश इस संतुलन को साधने में सफल होता है, तो राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि राज्य के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होंगे.
