यादव ने दिल्ली एनसीआर प्रदूषण संकट समाधान की राजस्थान, पंजाब की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की

नयी दिल्ली, 06 जनवरी (वार्ता) केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण समस्या से निपटने के लिए राजस्थान एवं पंजाब की कार्य योजनाओं पर विस्तृत चर्चा के लिए मंगलवार को यहां उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।

श्री यादव की अध्यक्षता में हाल में इस तरह की यह पांचवीं बैठक थी। प्रदूषण संकट के समाधान के लिए यह समीक्षाओं की श्रृंखला में पांचवीं और महत्वपूर्ण बैठक थी। यह बैठक श्री यादव द्वारा तीन दिसंबर को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों एवं प्रारूपों पर आयोजित की गई थी।

केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान की विस्तृत कार्य योजना की समीक्षा करते हुए अलवर, भिवाड़ी, नीमराना एवं भरतपुर में सार्वजनिक परिवहन की कमियों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता के आधार पर खरीदा जाएगा और समय-सीमा अनुसार इस बारे में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। उनका यह भी कहना था कि शहरी क्षेत्रों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर भी चार्जिंग संरचना से संबंघित सुविधा को मिशन मोड पर आगे बढ़ाया जाएगा। भिवाड़ी और नीमराना में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अनियोजित ट्रक पार्किंग को एक बड़ी समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए त्वरित कार्रवाई की जरूरत है जिसमें पार्किंग स्थल की पहचान एवं भीड़भाड़ से बचने के लिए पार्किंग योजना तैयार करना शामिल है।

श्री यादव ने पंजाब की प्रस्तुति का अवलोकन करते हुए कहा कि सभी फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की कार्यशील स्थिति सुनिश्चित कर उनका कुशलतापूर्वक उपयोग करना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने मशीनों की कार्यशील स्थिति को प्रमाणित करने के लिए मानक परिचालन तैयार करने की भी बात की। उन्होंने कृषि मंत्रालय से हितधारकों एवं वैज्ञानिकों के परामर्श से फसल अवशेषों का प्रभावी प्रबंधन और पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए नवीन उपायों पर विचार-विमर्श करने का आग्रह किया। मौजूदा उपायों की प्रभावशीलता पर आत्म-परीक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। पेलेटाइजेशन संयंत्रों को प्रोत्साहित करना चाहिए और फसल अवशेषों का उपयोग तापीय विद्युत संयंत्रों एवं ईंट भट्टों में किया जाना चाहिए। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सबसे पर्यावरण-अनुकूल समाधान के रूप में संपीड़ित जैव गैस संयंत्रों की स्थापना पर बल दिया गया। फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी को भी प्रोत्साहित किया गया।

 

 

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