नई दिल्ली | 06 जनवरी, 2026: आगामी बजट 2026 को लेकर देश के नौकरीपेशा वर्ग और करदाताओं के बीच उत्साह चरम पर है। चर्चा है कि वित्त मंत्री नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए 30% वाले उच्चतम टैक्स ब्रैकेट की सीमा में बड़ा विस्तार कर सकती हैं। पिछले बजट में इस सीमा को ₹15 लाख से बढ़ाकर ₹24 लाख किया गया था, लेकिन अब विशेषज्ञों और करदाताओं की मांग है कि इसे ₹40 से ₹50 लाख तक ले जाया जाए। यदि ऐसा होता है, तो उच्च मध्यम वर्ग के लाखों लोगों की डिस्पोजेबल आय में भारी वृद्धि होगी।
मौजूदा वित्तीय ढांचे में ₹12.75 लाख तक की सालाना आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट के चलते प्रभावी टैक्स शून्य बना हुआ है। हालांकि, ₹24 लाख से ऊपर की आय पर सीधा 30% का बोझ कई करदाताओं के लिए चिंता का विषय है। बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की ₹75,000 की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर ₹1 लाख कर सकती है। इसके साथ ही, ₹15 लाख से ₹24 लाख के बीच के स्लैब में भी दरों में कटौती की संभावना जताई जा रही है, जिससे घरेलू खपत और निवेश को नई ऊर्जा मिल सकेगी।
सरकार का स्पष्ट झुकाव नई टैक्स व्यवस्था को डिफॉल्ट और सरल बनाने की ओर है। पुरानी व्यवस्था में जटिल निवेश और कागजी कार्रवाई की तुलना में न्यू रिजीम को करदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक पेश किया जा रहा है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि सरकार टैक्स सीमा में ढील देती है, तो इससे लोगों के पास बचत के लिए अधिक पैसा बचेगा। फिलहाल सभी की निगाहें वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी हैं कि क्या वे मध्यम वर्ग को इस महंगाई के दौर में टैक्स स्लैब विस्तार की बड़ी खुशखबरी देंगी।

