अब देरी से नहीं चलेंगी ट्रेनें, संचालन सुचारू बनाने के लिए रेलवे ने उठाया कदम

ग्वालियर: यात्रियों के लिए सुचारू और अधिक भरोसेमंद सफर सुनिश्चित करने के मकसद से रेलवे ने कमर्शियल, ऑपरेटिंग, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट की एक संयुक्त टीम बनाई है. इस पहल का मकसद वैगन से जुड़ी दिक्कतों को पहले से पहचानना और उन्हें ठीक करना, मैकेनिकल खराबी को कम करना और सुरक्षित और सुचारू ट्रेन संचालन सुनिश्चित करना है.अक्सर देखा गया है कि वैगन ट्रेनों में तकनीकी खराबी की वजह से ऑपरेशन में रुकावट आती है, जिससे उनके पीछे चल रही यात्री ट्रेनों को आगे बढ़ने के लिए उसी रूट के क्लीयरेंस का लंबा इंतजार करना पड़ता है या उन्हें दूसरे रूट पर भेज दिया जाता है, जिससे यात्री ट्रेनें देरी से चलती हैं और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है.

यह टीम रुकावटों को कम करेगी और रेल सेवा को और भरोसेमंद बनाएगी. रेलवे जोन ने वैगन में ग्रीस सील को नुकसान होने की कई घटनाओं की रिपोर्ट दी है, खासकर खुले वैगन में. ये नुकसान ज्यादातर तिरपाल कवर, नायलॉन की रस्सी, तार और दूसरी ढीली चीजों के ट्रेन के चलने के दौरान एक्सल बॉक्स एरिया में फंसने से होते हैं. ऐसी घटनाओं से मैकेनिकल खराबी और वैगन रुक सकते हैं, जिससे ऑपरेशन में रुकावट आ सकती है. इससे भी जरूरी बात यह है कि इनसे सुरक्षा को खतरा हो सकता है, जिससे ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही पर असर पड़ता है, जिसका सीधा असर यात्री ट्रेनों और पूरी रेल सुरक्षा पर पड़ता है.

रेलवे ने कहा कि इन मुद्दों पर ध्यान देना, रेलवे के सुचारू परिचालन और उच्च सुरक्षा मानक बनाए रखने के लिए जरूरी है.इस समस्या के प्रभाव के बारे में बताते हुए ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के रामशरण ने बताया, “यहां तक ​​कि मामूली लगने वाली चीजों के भी परिचालन संबंधी नतीजे गंभीर हो सकते हैं. रस्सी या ढीले सामान जैसी है छोटी चीजें अक्सर वैगन में तकनीकी दिक्कतें पैदा करती हैं, जिससे उनके पीछे चल रही ट्रेनों की आवाजाही में रुकावट आती है. इस वजह से, कई ट्रेनें क्लीयरेंस का इंतजार करते हुए या दूसरे रूट पर डायवर्ट होने के कारण बेवजह लेट हो जाती हैं.

रेलवे ने कहा कि संयुक्त टीम ने लोडिंग और अनलोडिंग पॉइंट पर सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों और प्रक्रियात्मक कार्यों को साफ-साफ बताया है. इन गाइडलाइंस का मुख्य फोकस सुरक्षा की निगरानी करनी है और यह सुनिश्चित करना है कि वैगन सुरक्षित और ठीक से तिरपाल से ढके हों और लोडिंग या अनलोडिंग के बाद कोई ढीला या लटका हुआ कवर, रस्सी, तार या दूसरा सामान पीछे न छूटे. इन चीजों को उद्गम पर ही ठीक करके, रेलवे का मकसद टाली जा सकने वाली तकनीकी दिक्कतों को रोकना और सुरक्षा के साथ अधिक भरोसेमंद ट्रेन संचालन सुनिश्चित करना है

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