भारतीय सेना के इंजीनियरों ने ‘दितवा’ से प्रभावित श्रीलंका में दो महत्वपूर्ण ब्रिज बनाये

नयी दिल्ली 05 जनवरी (वार्ता) भारतीय सेना के इंजीनियर चक्रवाती तूफान दितवा से बुरी तरह प्रभावित श्रीलंका में बंद पड़े सड़क मार्गों को ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति तथा वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना के अनुरूप ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ के तहत खोलने में जुटे हुए हैं और उन्होंने जाफाना में 100 फुट से लंबे दो बेली ब्रिज बनाये हैं। सेना के अनुसार उसके इंजीनियर श्रीलंका को निरंतर मानवीय सहायता प्रदान कर रहे हैं। सागर बंधु अभियान के तहत भारतीय सेना के इंजीनियर श्रीलंकाई सेना तथा ‘रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी’ (आरडीए) के साथ तालमेल से बाधित संचार मार्गों को खोलने में महत्वपूर्ण सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। जाफना क्षेत्र में ए-35 राजमार्ग पर 120 फुट लंबे दोहरे कैरिजवे बेली ब्रिज के सफल निर्माण के बाद भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने अब बी-492 राजमार्ग पर 100 फुट लंबा बेली ब्रिज निर्मित किया है, जिससे सेंट्रल प्रांत (कैंडी) और उवा प्रांत (बदुल्ला) के बीच महत्वपूर्ण सड़क संपर्क स्थापित हो गया है। चक्रवात के कारण भूस्खलनों तथा मौजूदा पुलों के ध्वस्त हो जाने के कारण यह मार्ग गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, जिससे यात्रियों को चार घंटे तक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था।

भारतीय सेना के 24 अत्यंत कुशल ब्रिजिंग विशेषज्ञों की समर्पित टीम ने रविवार को पुल निर्माण कार्य प्रारंभ किया और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के बावजूद मात्र एक दिन में पूरा पुल सफलतापूर्वक तैयार कर दिया। इस पुल के बनने से अंतर- प्रांतीय यातायात फिर से सुचारू रूप से चालू हो गया है तथा कैंडी से बदुल्ला की यात्रा अवधि चार घंटे से घटकर दो घंटे रह गई है। इससे महत्वपूर्ण समय की बचत हुई है तथा राहत सामग्री, मशीनरी और आवश्यक सेवाओं की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित होने के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में प्रभावित समुदायों के लिए सामान्य स्थिति की बहाली में सहायता मिली है।
पुल तैयार करने से पहले दोनों तटों पर आधार संरचनाओं की भार वहन क्षमता बढ़ाने हेतु आवश्यक सुदृढ़ीकरण कार्य किए गए। इंजीनियर टास्क फोर्स द्वारा सटीक स्थल आकलन और सतत निगरानी के लिए स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन, लेज़र रेंज फाइंडर (एलआरएफ) तथा उन्नत टोही उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया गया, जिससे सटीकता, सुरक्षा और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा निर्माण अवधि में कमी आई। ऑपरेशन सागर बंधु क्षेत्र में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में एक विश्वसनीय दृढ़ साझेदार के रूप में भारत की भूमिका का सशक्त प्रमाण बना हुआ है।

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