कांग्रेस को संजीवनी तो भाजपा के लिए आत्म चिंतन का अलार्म

विंध्य की डायरी

डा. रवि तिवारी

निकाय एवं त्रि-स्तरीय पंचायत उप चुनाव में भाजपा की करारी हार के साथ कांग्रेस को संजीवनी मिली है. भाजपा खेमे में जहां खलबली मची है वहीं कांग्रेस उत्साहित नजर आ रही है. रीवा में पहली बार नगरीय निकाय में अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता के मतों के माध्यम से हुआ. सेमरिया परिषद अध्यक्ष पर कांग्रेस का कब्जा हो गया. यहां भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा. कांग्रेस की पदमा रोहणी कुशवाहा अध्यक्ष चुनी गई. वार्ड पार्षद के उपचुनाव में भी भाजपा के हाथ जीत नहीं लगी. जिला पंचायत वार्ड 16 के उप चुनाव में भी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ने जीत दर्ज की. पहले ही इम्तिहान में भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता असफल हो गये. उनके कार्यकाल का यह पहला चुनाव था जहां संगठन को साधने कार्यकर्ताओं में तालमेल बैठाने के साथ चुनावी समीकरण को साधने में असफल साबित हुए. कांग्रेस के विधायक अभय मिश्रा ने अपनी रणनीति पर सफल होते हुए भाजपा को मात दी.

सेमरिया में हार के पीछे भाजपा के गुटो में बटा होना भी एक कारण है. वही ऊर्जाधानी में नगर निगम वार्ड 34 के पार्षद पद उप चुनाव में भाजपा को मिली करारी शिकस्त ने पार्टी संगठन की जड़ों को हिला कर रख दिया है. जिस वार्ड को भाजपा सुरक्षित मान कर चल रही थी वहां कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत ने राजनीतिक समीकरण बदल दिये. यह जीत कांग्रेस के लिये संजीवनी साबित हुई है और भाजपा के लिये यह हार आत्ममंथन का अलार्म है. तो वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष सुन्दरलाल शाह के लिये पहला बड़ा इम्तिहान था जिसमें पार्टी को करारा झटका लगा. इस हार के बाद पार्टी की जमकर किरकिरी हो रही है. दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नही छोड़ी.

सांसद ने ली माला न पहनने की शपथ

अति महात्वाकांक्षी ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना को लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है. पटरी बिछाने के साथ ट्रायल भी हो चुका है. इस बीच सीधी के सांसद ने एक अलग ही शपथ ली है. सीधी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होने शपथ ली कि जब तक सीधी जिला मुख्यालय में रेल का ट्रायल नहीं हो जाता वो किसी भी कार्यक्रम में माला नहीं पहनेंगे. शपथ से यह स्पष्ट हो गया है कि सीधी में रेल लाने वो कितने संजीदा है. उम्मीद है कि सांसद जी शपथ लेने के साथ अपने कार्यकाल के अंदर सीधी तक रेल गाड़ी पहुंचा कर ही दम लेंगे. फिलहाल रामपुर नैकिन व चुरहट के बीच ट्रैक बिछाने का कार्य जारी है. वर्षो पूर्व देखा गया सपना जल्द ही साकार होगा. सीधी में रेल पहुंचने के बाद यहां के विकास को भी गति मिलेगी.

बगैर कांग्रेस जिला अध्यक्ष के विरोध प्रदर्शन

इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत और प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विवादित बयान के विरोध में रीवा में भी कांग्रेसियो ने घंटी बजाकर सांसद के शासकीय आवास से कुछ दूर पर विरोध प्रदर्शन किया. चंद कांग्रेसियो से कई गुना ज्यादा पुलिसबल तैनात था जिसके चलते सांसद के आवास गेट तक कांग्रेसी नही पहुंच पाए. शंख और घंटी बैरीकेट्स के बाहर ही बजाते रहे. दरअसल इस विरोध प्रदर्शन से जिलाध्यक्ष इंजी. राजेन्द्र शर्मा और महापौर अजय मिश्रा बाबा ने खुद को दूर रखा. जनता के हितो और उनके हको की लड़ाई लडऩे की बात करने वाले कांग्रेस नेता घर में मुंह छिपाकर बैठे थे, टीवी और मीडिया के सामने आकर जनता के हिमायती बनने वाले वह नेता भी विरोध प्रदर्शन से दूर थे जो टिकट की दावेदारी पर हक जताते है. सांसद के घर विरोध करने नहीं पहुंचे. कार्यकर्ता बगैर जिला मुखिया इंजी. राजेन्द्र शर्मा के सांसद के घर लिये कूच कर गए. नेतृत्व का दायित्व शहर अध्यक्ष अशोक पटेल ने सम्भाला. विधानसभा की टिकट के दावेदारो की सूची भले ही सैकड़ो के ऊपर हो, लेकिन सडक़ पर उतर कर विरोध करने की जब बात आती है तो आधा सैकड़ा भी कांग्रेस नेता नहीं दिखते . अब सवाल यह उठता है कि जब यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशन पर था तो फिर अति संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस के चाहे जिलाध्यक्ष हो या टिकट की लालसा रखने वाले नेता, सांसद का घर घेरने क्यो नहीं पहुंचे? क्या ऐसे में कार्यकर्ताओं का मनोबल नही टूटता. सांसद का घर घेरने वाले जितने कांग्रेसी थे उससे कहीं ज्यादा पुलिसकर्मी थे. जो नेता विरोध से दूर थे क्या इन्हीं के दम पर रीवा में सत्ता परिवर्तन की नींव रखी जा सकती है?

……..फिर निरस्त हुआ सीएम का कार्यक्रम

सिहावल विधानसभा क्षेत्र के गृह नक्षत्र इस समय कुछ ठीक नहीं चल रहे है. हर बार प्रदेश के मुखिया डा. मोहन यादव का कार्यक्रम निरस्त हो रहा है. ऐसा लग रहा है कि यहां शनि की महादशा चल रही है. तीसरी बार मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय होने के बाद अचानक निरस्त हो गया. क्षेत्रीय विधायक विश्वामित्र पाठक ने हाल ही में भोपाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर क्षेत्रीय जनता की भावनाओं से अवगत कराते हुए 3 जनवरी को बहरी आने का आमंत्रण दिया था, सीएम ने भी औपचारिक स्वीकृत दी थी. प्रशासनिक तैयारी के बीच अचानक कार्यक्रम निरस्त हो गया. क्षेत्र की जनता मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर बेसब्री से इंतजार कर रही थी. विधायक को भी उम्मीद थी कि बड़ी सौगात सीएम देंगे पर कार्यक्रम निरस्त होने के बाद निराशा हाथ लगी.

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