
सीहोर। इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को हिला दिया, लेकिन इसके बावजूद सीहोर में प्रशासन चेतने को तैयार नहीं दिख रहा है. शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में नलों से गंदा, बदबूदार और मटमैला पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे नागरिकों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
शहर में 1980 के दशक की पार्वती नलजल योजना की पाइपलाइन अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. जगह-जगह लीकेज के कारण नालियों की गंदगी सीधे पेयजल में मिल रही है. हालात इतने खराब हैं कि कई क्षेत्रों में पीले रंग का पानी, बदबूदार जल और कहीं-कहीं पक्षियों के पंख तक नलों से निकल रहे हैं. मजबूरी में नागरिक इसी पानी को पीने और भोजन बनाने में उपयोग कर रहे हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी से डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक खतरा है. हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो स्वास्थ्य विभाग ने कोई चेतावनी जारी की है और न ही पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है.
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद नगर पालिका आंखें मूंदे बैठी है. सवाल उठ रहा है कि क्या सीहोर प्रशासन किसी इंदौर जैसी त्रासदी के इंतजार में है?
वहीं नगर पालिका परिषद की बैठक में नपाध्यक्ष प्रिंस विकास राठौर ने पाइपलाइन की जांच, लीकेज सुधार और स्वच्छ जल आपूर्ति के निर्देश दिए हैं तथा एक विशेष टीम भी गठित की गई है. अब देखना यह है कि ये निर्देश जमीन पर कब और कितनी गंभीरता से लागू होते हैं.
