नई दिल्ली | 02 जनवरी, 2026: अमेरिकी ‘फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट’ (FARA) के हालिया दस्तावेजों ने वाशिंगटन में पाकिस्तान की गहरी साजिशों को बेनकाब कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर की सरकार ने अमेरिका में भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने और अपनी गिरती छवि सुधारने के लिए लाखों डॉलर खर्च किए हैं। पाकिस्तान के ‘नेशनल सिक्योरिटी डिवीजन’ से जुड़े संस्थान ‘इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट’ ने अकेले लॉबिंग के लिए करीब 9 लाख डॉलर (लगभग 7.5 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम बजट झोंक दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नीति निर्माताओं को प्रभावित करना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की घेराबंदी करना है।
पाकिस्तान ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ‘हाइपरफोकल कम्युनिकेशंस’ और ‘एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप’ जैसी अमेरिकी कंपनियों को भारी भुगतान पर नियुक्त किया है। दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तानी दूतावास ने 2025 में हर महीने 25 हजार डॉलर के अनुबंधों के जरिए अमेरिकी कांग्रेस और मीडिया में पैठ बनाने की कोशिश की। इस लॉबिंग का सीधा निशाना जम्मू-कश्मीर विवाद और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर नकारात्मक नैरेटिव सेट करना था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पिछले वर्ष मई में हुई सैन्य झड़पों के बाद, पाकिस्तान अब अमेरिका में लॉबिस्टों के सहारे खुद को पीड़ित दिखाने और भारत को एक आक्रामक शक्ति के रूप में चित्रित करने का असफल प्रयास कर रहा है।
पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने ‘कॉर्विज़ होल्डिंग इंक’ जैसी फर्मों के जरिए मीडिया आउटरीच और नैरेटिव डेवलपमेंट पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, ताकि भारत-अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों में दरार डाली जा सके। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों पर निरंतर नजर रख रही हैं। अमेरिकी थिंक टैंकों की हालिया रिपोर्टों ने भी चेतावनी दी है कि पाकिस्तान द्वारा पालित आतंकी गतिविधियों के कारण 2026 में पुनः संघर्ष की स्थिति बन सकती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद और दुष्प्रचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर कायम रहेगा और पाकिस्तान की किसी भी अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग का जवाब कूटनीतिक और सामरिक मजबूती से दिया जाएगा।

