ल्यों (फ्रांस), 29 दिसंबर (वार्ता) यूरोप में जनरेटिव एआई अपनाने के मामले में नॉर्वे सबसे आगे है, जहां 56 प्रतिशत लोग ऐसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि तुर्की का नाम इस लिस्ट में सबसे नीचे है जहां यह आंकड़ा केवल 17 प्रतिशत है। यह जानकारी यूरोस्टैट के 2025 के सर्वेक्षण के आधार पर यूरोन्यूज़ नेक्स्ट की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
चैटजीपीटी, जेमिनाई और ग्रॉक जैसे एआई प्लेटफॉर्म जो यूज़र के सवालों या निर्देशों के आधार पर टेक्स्ट, तस्वीरें, कोड, वीडियो और अन्य कंटेंट तैयार कर सकते हैं, जनरेटिव एआई कहलाते हैं। ये टूल्स अपने इस्तेमाल के साथ अनुभव इकट्ठा करते हैं, जिससे ये बेहतर काम कर सकते हैं। यूरोपीय संघ (ईयू) में 16 से 74 वर्ष की आयु के लगभग एक-तिहाई लोग (33 प्रतिशत ) कम से कम एक बार इन टूल्स का इस्तेमाल कर चुके हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पूरे यूरोप में इसका इस्तेमाल समान नहीं है। यूरोप के 33 देशों में यह दर काफी अलग-अलग है। ईयू के भीतर रोमानिया में केवल 18 प्रतिशत लोग जनरेटिव एआई का इस्तेमाल करते हैं, जबकि डेनमार्क में यह आंकड़ा 48 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
यूरोप के 13 देशों में हर पांच में से कम से कम दो लोग पिछले तीन महीनों में जनरेटिव एआई टूल्स का उपयोग कर चुके हैं। इनमें स्विट्ज़रलैंड (47 प्रतिशत ), एस्टोनिया (47 प्रतिशत), माल्टा (46 प्रतिशत), फ़िनलैंड (46 प्रतिशत), आयरलैंड (45 प्रतिशत), नीदरलैंड्स (45 प्रतिशत, साइप्रस और ग्रीस (44 प्रतिशत), लक्ज़मबर्ग (43 प्रतिशत,) बेल्जियम (42 प्रतिशत) और स्वीडन (42 प्रतिशत) शामिल हैं।
दूसरी ओर, आठ देशों में जनरेटिव एआई का इस्तेमाल 25 प्रतिशत से भी कम है। तुर्की और रोमानिया के अलावा इसमें सर्बिया (19 ), इटली (20 प्रतिशत), बोस्निया और हर्ज़ेगोविना (20 प्रतिशत, नॉर्थ मैसेडोनिया (22 प्रतिशत), बुल्गारिया (23 प्रतिशत) और पोलैंड (23 प्रतिशत) शामिल हैं। ईयू की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बात करें तो इटली (20 प्रतिशत) और जर्मनी (32 प्रतिशत) ईयू की औसत से नीचे हैं, जबकि स्पेन (38 प्रतिशत) और फ्रांस (37 प्रतिशत) औसत से थोड़ा ऊपर हैं।
आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि यूरोप में एआई अपनाने में उत्तर-दक्षिण और पश्चिम-पूर्व का स्पष्ट विभाजन है। नॉर्डिक और डिजिटल रूप से उन्नत देश सबसे आगे हैं। पश्चिमी यूरोप का प्रदर्शन मिला-जुला है, जबकि दक्षिणी, पूर्वी और बाल्कन क्षेत्र के देश पीछे चल रहे हैं।
यूरोन्यूज़ की रिपोर्ट बेल्जियम की केयू लियूवेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता कोलिन वैन नूर्ड्ट के हवाले से बताती है कि एआई अपनाने की दर किसी देश की डिजिटल बुनियाद पर निर्भर करती है। जिन देशों में इंटरनेट का व्यापक इस्तेमाल, डिजिटल स्किल्स और तकनीक के प्रति सहजता पहले से मौजूद है, वहां जनरेटिव एआई तेजी से अपनाई जा रही है।
उनका कहना है कि कई देशों में लोग एआई का इस्तेमाल इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें या तो इसके अस्तित्व की जानकारी नहीं है या यह समझ नहीं है कि इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे इस्तेमाल किया जाए। इसे वे ‘एआई लिटरेसी’ की कमी बताते हैं।
