इंदौर: बैंकों से हजारों करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़े रुची सोया ग्रुप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कस दिया है. ईडी इंदौर सब जोनल ऑफिस की टीम ने इंदौर और मुंबई में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत की गई है.ईडी की अधिकृत जानकारी के अनुसार यह जांच सीबीआई भोपाल द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी.
जांच के दायरे में रुची सोया ग्रुप से जुड़ी कंपनियां एम/एस रुची ग्लोबल लिमिटेड (अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड), एम/एस रुची एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड) और एम/एस आरएसएएल स्टील प्राइवेट लिमिटेड (अब एलजीबी स्टील प्राइवेट लिमिटेड) शामिल हैं. ये कंपनियां स्वर्गीय कैलाश चंद्र शारड़ा और उमेश शारड़ा द्वारा प्रवर्तित बताई गई हैं. ईडी जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने सुनियोजित तरीके से कई शेल कंपनियां बनाईं और इनके जरिए राउंड-ट्रिपिंग कर बैंक फंड्स का दुरुपयोग किया.
जांच एजेंसी के मुताबिक, फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट और कैश क्रेडिट के लेन देन कर कर्ज की रकम को इधर उधर घुमाया. इसके साथ ही कागजों में फर्जी खरीद बिक्री दिखाकर जानबूझकर घाटा दर्शाया गया, ताकि बैंकों से लिए गए लोन की रकम को निजी फायदे के लिए निकाल लिया जाए. इस पूरे खेल में अपराध से कमाई गई रकम को छिपाने और वैध दिखाने की कोशिश की गई. छापेमारी के दौरान ईडी ने आरोपितों और उनके परिजनों के नाम पर मौजूद 20 लाख रुपए से ज्यादा की बैंक राशि फ्रीज की है. वहीं 23 लाख रुपए से अधिक की नकदी भी जब्त की गई है.
इसके अलावा बड़ी संख्या में दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस मिले हैं, जो पूरे फ्रॉड में आरोपितों की भूमिका की ओर इशारा करते हैं. ईडी के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह कार्रवाई सीबीआई की एफआईआर के आधार पर की गई है और जांच में बैंक फंड के डायवर्जन व सायफनिंग के पुख्ता सबूत सामने आए हैं. अधिकारी का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है. मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है.
