मध्य प्रदेश की विकास-यात्रा इन दिनों एक निर्णायक मोड़ से गुजर रही है. ग्वालियर की धरती से शुरू हुई ‘अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट’ केवल एक आर्थिक आयोजन भर नहीं, बल्कि सुशासन और परिणाम केंद्रित प्रशासनिक सोच का प्रतीक बनकर उभरी है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया है कि प्रदेश अब विकास को चुनावी वादे की तरह नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिक प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित कर रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिस गति, नीतिगत स्पष्टता और प्रशासनिक अनुशासन के साथ विकास मॉडल आगे बढ़ा रहे हैं, वह मध्य प्रदेश को एक कृषि-प्रधान राज्य से उभरते औद्योगिक पावरहाउस की ओर ले जाता दिखाई देता है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इस समिट को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया. इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि केंद्र और राज्य का डबल इंजन मॉडल अब नारे से आगे बढक़र नीति, निवेश और क्रियान्वयन का संयुक्त ढांचा बन चुका है. 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव, औद्योगिक परियोजनाओं की शुरुआत और रोजगार सृजन के आश्वासन इस बात का संकेत हैं कि विकास का प्रवाह अब क्षेत्रीय संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है. विशेष रूप से ग्वालियर,चंबल अंचल, जिसे कभी पिछड़े क्षेत्र के रूप में देखा जाता था, आज लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और नई औद्योगिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में नई पहचान गढ़ रहा है. दरअसल,डॉ. मोहन यादव की शासन शैली में कुछ तत्व स्पष्ट रूप से उभरते हैं,तेज निर्णय प्रक्रिया, डिजिटल मॉनिटरिंग, पारदर्शी अनुमोदन प्रणाली और परिणाम आधारित मूल्यांकन. इसी के साथ फाइल मूवमेंट से लेकर परियोजना ट्रैकिंग तक ई-गवर्नेंस का उपयोग निवेशकों और नागरिकों, दोनों के लिए भरोसे का वातावरण तैयार कर रहा है. यह वही सुशासन की भावना है, जिसकी वकालत अटल जी ने की थी कि जहां सत्ता सेवा का माध्यम बने और नीतियां कागज़ पर नहीं, जमीन पर दिखें. जाहिर है
प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब एकल क्षेत्र पर निर्भर नहीं है. खाद्य प्रसंस्करण, ऑटो-कंपोनेंट, रक्षा विनिर्माण, फार्मा सेक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और वेयरहाउसिंग,इन सभी क्षेत्रों में विस्तार यह दर्शाता है कि निवेश का लक्ष्य केवल आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि उत्पादन, मूल्य संवर्धन और स्थानीय रोजगार सृजन है. युवाओं के लिए कौशल विकास और उद्योग के लिए नीति स्थिरता,यह संयोजन मध्य प्रदेश को निवेश,अनुकूल राज्य के रूप में सुदृढ़ करता है. यह ध्यान रखना होगा कि सुशासन का दायरा केवल उद्योग और पूंजी तक सीमित नहीं रह सकता. शहरी सेवाओं, ग्रामीण सडक़ों, सिंचाई, स्वास्थ्य अवसंरचना और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूती देना इस मॉडल का महत्वपूर्ण सामाजिक आयाम है. यही वह बिंदु है, जहां विकास और न्याय दोनों समानांतर रूप से कार्य करते दिखाई देते हैं. यही संतुलन सुशासन को लोक कल्याण से जोड़ता है.
यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि सारी चुनौतियां खत्म हो गई हैं. निवेश प्रस्तावों को वास्तविक रोजगार में बदलना, क्षेत्रीय असमानताओं को न्यूनतम करना और औद्योगिक विस्तार के साथ सामाजिक संवेदनशीलता बनाए रखना,ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सतत निगरानी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता बनी रहेगी. परंतु यह भी उतना ही स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश ने विकास को नीतिगत प्राथमिकता के रूप में अपनाया है. बहरहाल,उम्मीद की जानी चाहिए कि योजनाओं के ख्याल में भी इतनी ही कुशलता दिखाई जाएगी.
