नई दिल्ली। 25 दिसंबर, 2025। निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब केंद्र सरकार की विशेष जांच एजेंसी SFIO (गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय) ने बैंक के खिलाफ जांच का मोर्चा संभाल लिया। बैंक ने स्वयं शेयर बाजार को सूचित किया है कि उसे 23 दिसंबर को SFIO की ओर से आधिकारिक जांच का आदेश प्राप्त हुआ है। यह पूरा मामला बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में हुई अकाउंटिंग विसंगतियों से जुड़ा है, जिसके कारण बैंक को लगभग 1,960 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। बाहरी लेखा परीक्षकों (Auditors) द्वारा विसंगतियों का खुलासा किए जाने के बाद अब बैंक की साख और निवेशकों के भरोसे पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और SFIO के निष्कर्षों में विरोधाभास देखा गया। कुछ समय पहले मुंबई पुलिस की EOW ने अपनी प्रारंभिक जांच में कहा था कि उसे फंड की हेराफेरी या किसी आपराधिक मंशा का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिसके आधार पर मामले को बंद करने की तैयारी थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए अब इसकी बागडोर SFIO को सौंप दी है। SFIO अब इस बात की गहराई से पड़ताल करेगा कि क्या यह केवल एक अकाउंटिंग त्रुटि थी या इसके पीछे किसी बड़े वित्तीय गबन की साजिश रची गई थी।
इस घोटाले का असर बैंक की बैलेंस शीट पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। स्वतंत्र एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, अकाउंटिंग की इन गंभीर गलतियों की वजह से 31 मार्च 2025 तक बैंक के लाभ-हानि खाते पर 1,959.98 करोड़ रुपये का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इतना ही नहीं, बैंक की कुल शुद्ध संपत्ति (Net Worth) में भी लगभग 1,979 करोड़ रुपये की भारी कमी आने की आशंका जताई गई है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि SFIO की जांच के परिणाम न केवल इंडसइंड बैंक के प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे, बल्कि पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो और अकाउंटिंग मानकों की समीक्षा का आधार भी बनेंगे।

