
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट से एक शराब कारोबारी को झटका लगा है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने शराब कारोबारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसका लाइसेंस निरस्त करने को चुनौती दी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने आवेदक को अपीलीय अधिकरण में अपील करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
दरअसल सतना निवासी कमलेश त्रिपाठी ने याचिका दायर कर बताया कि कलेक्टर ने 30 जून 2025 को शराब दुकान संचालन का उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया। इसके साथ ही दो जुलाई को नई निविदा जारी कर दी। उसे एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक का लाइसेंस मिला था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह कई वर्षों से इस व्यवसाय में है। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसकी दुकान से करीब पांच सौ मीटर के दायरे में एक अन्य व्यापारी की दुकान शिफ्ट कर दी, जिससे उसका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। वहीं शासन की ओर से कहा गया कि शराब नीति के अनुसार लाइसेंस धारक को एक पखवाड़े की पूरी राशि जमा नहीं करता है, तो सात दिनों के बाद सहायक आयुक्त उसे नोटिस देगा। नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं करने पर लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। याचिकाकर्ता ने उक्त शुल्क जमा नहीं किया था। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि याचिकाकर्ता नियम का पालन नहीं कर रहा है। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि आबकारी अधिकारियों की कार्रवाई उचित है। उक्त मत के साथ न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए आवेदक को स्वतंत्रता दी कि वह अपीलीय अधिकरण में अपील कर सकता है।
