मप्र में वोटर लिस्ट में बड़ी छंटनी, ड्राफ्ट सूची में 42 लाख से ज्यादा नाम कटे

भोपाल। मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR) के तहत मतदाता सूची की प्रारंभिक (ड्राफ्ट) सूची जारी होते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मंगलवार दोपहर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने यह ड्राफ्ट लिस्ट सार्वजनिक की, जिसमें 42 लाख 74 हजार 160 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खुलासा हुआ है।

महिलाओं के नाम कटने की संख्या अधिक

ड्राफ्ट सूची के आंकड़ों के अनुसार हटाए गए मतदाताओं में 19 लाख 19 हजार पुरुष और 23 लाख 64 हजार महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 8 लाख 40 हजार ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी। इन मामलों में आगे सुनवाई और जांच की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

मतदाता अपनी स्थिति की जानकारी निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन देख सकते हैं, जबकि ऑफलाइन सत्यापन और विवरण के लिए संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क किया जा सकता है।

स्थानांतरण और अनुपस्थिति बनी मुख्य वजह

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बताया कि SIR के दौरान प्रदेश के कुल 5 करोड़ 74 लाख 06 हजार 143 पंजीकृत मतदाताओं में से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 की कैलकुलेशन शीट प्राप्त हुई।

जांच में सामने आया कि

31 लाख 51 हजार मतदाता (5.49%) स्थान बदलने या लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए।

8 लाख 46 हजार मतदाता (1.47%) का निधन हो चुका है।

2 लाख 77 हजार मतदाताओं (0.48%) के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।

इन्हीं कारणों के चलते बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर किए गए हैं।

दावा-आपत्ति के बाद आएगी अंतिम सूची

निर्वाचन आयोग के अनुसार 22 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्ति दर्ज कराने का अवसर रहेगा। सभी आपत्तियों की जांच के बाद 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं, उन्हें नोटिस देकर नाम पुनः जोड़ने का मौका दिया जाएगा।

45 दिनों तक चला घर-घर सत्यापन अभियान

यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 7 नवंबर से शुरू होकर करीब 45 दिनों तक चला। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया। निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है।

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