नगर की पहचान भक्तों से होती है, महलों और भवनों से नहीं

इटारसी। किसी भी नगर की पहचान वहां निवासरत ईश्वर के भक्तों से होती है बड़ी-बड़ी इमारतों, महलों और भवनों से नहीं। जिस नगर में जितने अधिक नागरिक ईश्वर की भक्ति में लीन होते हैं, वह नगर उतना ही पूजनीय और वंदनीय हो जाता है। उक्त उद्गार धार्मिक नगरी इटारसी में जोधपुर के अंतर्राष्ट्रीय कथाव्यास गोवत्स राधा कृष्ण महाराज ने नानी बाई रो मायरो की कथा के प्रारंभिक दिवस पर व्यक्त किए। मालपानी परिसर में सोमवार से कथा का रसपान प्रारंभ हो गया है। राधाकृष्ण महाराज ने प्रथम दिवस की कथा का रसपान कराते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी आधुनिकता पर सवार होकर हमारे संस्कार भूलती जा रही है। हमारे संस्कार ही हमारी सनातनी होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। पहले दिखावा नहीं था, परंपराओं पर ही जीवन चलता था। प्रारंभ दिवस की कथा में महाराज श्री ने व्यासपीठ से नरसी मेहता की कथा के वृतांत सुनाए। नरसी मेहता को भगवत प्राप्ति की कथा विस्तार से श्रोताओं को सुनाई। कथा प्रारम्भ होने से पूर्व स्वागत गीत माहेश्वरी महिला मंडल इटारसी ने प्रकट किया। कथा यजमान मालपानी परिवार ने व्यासपीठ का पूजन एवं महाराज का स्वागत किया। महाराज का स्वागत क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा, विजय मालपानी, श्रीमती बेला प्रदीप मालपानी, मंगतूराम मालपानी, विनीत सुरभि मालपानी, टासू शशांक माहेश्वरी, सालासर बालाजी धाम पुजारी रविशंकर, पत्रकार प्रमोद पगारे, रमेश चांडक, सुधीर गोठी, राजेंद्र अग्रवाल, माहेश्वरी महिला संगठन इटारसी की महिलाओं द्वारा, एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा, थाना प्रभारी गौरव बुंदेला, राहुल सोलंकी, कल्पेश अग्रवाल सहित अन्य अतिथियों ने किया।

 

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