पश्चिम बंगाल में एसआईआर के तहत सुनवाई 27 दिसंबर से

कोलकाता, 22 दिसंबर (वार्ता) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सुनवाई की प्रक्रिया 27 दिसंबर से शुरू होगी।
चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने उन मतदाताओं के रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए विस्तृत व्यवस्था की है जिनके विवरण में विसंगतियां पाई गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि यह अभ्यास शुरू में 24 दिसंबर से शुरू होने वाला था, लेकिन अब इसकी शुरुआत की तारीख तीन दिन के लिए टाल दी गई है।
अब तक लगभग 10 लाख सुनवाई नोटिस पहले ही तैयार किए जा चुके हैं, जबकि जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अगले दो दिनों के भीतर सभी नोटिसों की छपाई सुनिश्चित कर लें। पहले चरण में लगभग 32 लाख मतदाताओं के लिए नोटिस तैयार किए जाएंगे। जिलों में इन नोटिसों का वितरण चरणबद्ध तरीके से शुरू हो चुका है।
शुरू मेंसुनवाई उन 32 लाख मतदाताओं पर केंद्रित होगी जिनके विवरण 2002 के विशेष गहन पुनरीक्षण रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं लेकिन जिनके नाम मतदाता सूची के मसौदे में दिखाई दिए। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक, यानी कुल 294 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) जिला प्रशासन के समन्वय में यह सुनवाई करेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के मसौदे में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें जांच से स्वतः छूट मिल गई है। अधिकारी ने कहा, “मसौदा सूची में नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा।”
सुनवाई के स्थानों का निर्धारण ईआरओ द्वारा संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों के परामर्श से किया जाएगा। नगर पालिका क्षेत्रों में सुनवाई सरकारी कार्यालयों में होगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालयों या अन्य प्रशासनिक भवनों जैसे सरकारी प्रतिष्ठानों में होगी। ग्राम पंचायत कार्यालयों में हालांकि सुनवाई नहीं की जाएगी।
प्रत्येक सुनवाई नोटिस दो प्रतियों में जारी किया जाएगा, जिसमें से एक प्रति मतदाता को सौंपी जाएगी और दूसरी प्रति मतदाता के हस्ताक्षर प्राप्त करने के बाद संबंधित बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) द्वारा रखी जाएगी।
इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए लगभग 4,000 सूक्ष्म पर्यवेक्षक की नियुक्ति के लिए नोटिस जारी किए हैं। इन पर्यवेक्षकों को सुनवाई शुरू होने से पहले 24 दिसंबर को निर्वाचन आयोग द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, सीईओ कार्यालय ने चुनाव आयोग को प्रस्ताव दिया है कि 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं को उनके निवास स्थान पर सुनवाई की अनुमति दी जाए। एक अन्य प्रस्ताव में सत्यापन की सुविधा के लिए सुनवाई के दौरान संबंधित बीएलओ की उपस्थिति की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है।
अप्रयुक्त मतदाताओं के शुरुआती बैच के अलावा, स्क्रीनिंग प्रक्रिया में 1.69 करोड़ से अधिक ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनके रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां हैं। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि बाद के चरणों में इनमें से ‘उचित संख्या’ में मतदाताओं को भी सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान, निर्वाचकों को अपनी भारतीय नागरिकता और मतदाता के रूप में पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे। आयोग दस्तावेजों की 11 श्रेणियों को स्वीकार करेगा, जिनमें राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारियों या पेंशनभोगियों के पहचान पत्र, 1987 से पहले डाकघरों, बैंकों, एलआईसी या स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी दस्तावेज, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, माध्यमिक या अन्य शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, राज्य सरकार के संगठनों द्वारा जारी आवासीय प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (केवल असम के लिए), स्थानीय प्रशासन द्वारा रखे गए परिवार रजिस्टर और सरकार द्वारा जारी भूमि या घर आवंटन प्रमाण पत्र शामिल हैं।
एसआईआर का नोटिस, सुनवाई और सत्यापन चरण सात फरवरी, 2026 तक जारी रहेगा। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।

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