सिंगरौली : ऊर्जाधानी में वायु प्रदूषण ने खतरनाक स्तर पार कर लिया है। जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 तक पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर गंभीर श्रेणी में आता है। बीते एक सप्ताह से लगातार प्रदूषण के हालात बिगड़े हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अमला कोई ठोस और प्रभावी कदम उठाने में नाकाम नजर आ रहा है। हवा में घुला जहर अब आमजन की सेहत पर सीधा हमला कर रहा है।
जिले के बैढ़न, अमलोरी, निगाही और मोरवा क्षेत्र इस समय प्रदूषण की सबसे भयावह मार झेल रहे हैं। कोयला खदानें, थर्मल परियोजनाएं, भारी वाहन और उड़ती कोयला डस्ट ने हवा को पूरी तरह जहरीला बना दिया है। सुबह-शाम आसमान में धुंध की मोटी परत साफ दिखाई दे रही है, जो कोहरे से ज्यादा प्रदूषण की चादर प्रतीत होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत अब आम समस्या बन गई है। बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, लेकिन प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर न तो निगरानी है और न ही सख्ती।
कागजों में नियंत्रण, जमीन पर जहर
चिकित्सकीय सूत्रों के अनुसार जिले में दमा, सांस की तकलीफ, एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अस्पतालों में सांस से संबंधित शिकायतों वाले मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, जो हालात की गंभीरता को साफ दर्शाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक्यूआई 300 जैसे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, तब भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन क्यों मूकदर्शक बने हुए हैं, न तो कोयला परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण दिख रहा है, न सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव और न ही उद्योगों पर कोई सख्त कार्रवाई।
