
इंदौर। दीपावली त्योहार की रात हुई एक युवक की मौत का मामला अदालत में टिक नहीं सका. सुनवाई के दौरान अहम गवाहों के बयान पलटने और ठोस सबूतों के अभाव में हत्या के आरोप कमजोर पड़ गए. नतीजतन, करीब दो साल पुराने इस प्रकरण में अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया.।
मामला एमआईजी थाना क्षेत्र के अंबेडकर नगर का है, जहां 25 . 26 अक्टूबर 2022 की दरम्यानी रात दीपावली के मौके पर एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था. सर्वहारा नगर में रहने वाले मोहन के पिता राजेश अंबेडकर नगर स्थित एक ऑटो सर्विस सेंटर पर काम करते थे. देर रात तक पिता के घर नहीं लौटने पर मोहन अपने रिश्तेदार शुभम के साथ सर्विस सेंटर पहुंचा था. बताया गया कि सर्विस सेंटर की छत पर वहां काम करने वाले कुछ लोगों के साथ पत्ते खेले जा रहे थे. पिता को घर ले जाने की बात पर मोहन का आरोपी अंकुश से विवाद हुआ था. आरोप था कि इसी दौरान अंकुश ने मोहन के सिर पर बल्ली से हमला किया, जिससे वह गिर पड़ा. इसके बाद राजेश और शुभम घायल मोहन को घर ले गए. सुबह हालत नहीं संभलने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गंभीर चोट के कारण मौत होना सामने आया था. इस मामले में शुभम की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी अंकुश के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया और चालान कोर्ट में पेश किया. हालांकि ट्रायल के दौरान मामला तब कमजोर पड़ गया, जब फरियादी शुभम और मृतक के पिता राजेश दोनों ही अदालत में पक्षद्रोही हो गए. उन्होंने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया और कहा कि उन्होंने पुलिस को कोई बयान नहीं दिए थे. गवाहों ने यह भी दावा किया कि मृतक ने अत्यधिक शराब पी रखी थी और संभवतः चढ़ाव से गिरने के कारण उसके सिर में चोट आई थी. ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आ सका, जिससे आरोप की पुष्टि हो सके. मामले की सुनवाई कर रहे अपर सत्र न्यायाधीश सुनील अहिरवार की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के पलटने को आधार मानते हुए आरोपी अंकुश को बरी कर दिया.
