भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल द्वारा संचालित एमएससी नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर गंभीर चिंता जताई। रवि परमार लंबे समय से प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल उठाते आ रहे हैं। पूर्व में उन्हें प्रवेश परीक्षा में शामिल होने से रोका गया था, बाद में उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद वे परीक्षा में शामिल हो पाए थे। अब उन्होंने एक बार फिर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने दलील दी कि एमएससी नर्सिंग की प्रवेश प्रक्रिया मनमाने ढंग से संचालित की जा रही है। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अधिवक्ता को 15 दिसंबर को न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए।
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि पोस्ट बीएससी एवं एमएससी नर्सिंग की काउंसलिंग की समय-सारणी जारी होने के बावजूद परिषद की वेबसाइट गैर-कार्यशील है, जिससे पात्र अभ्यर्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। न्यायालय के संज्ञान में यह भी लाया गया कि भारतीय नर्सिंग परिषद को भेजे गए पत्र में 3 दिसंबर 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रवेश परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के प्रवेश में कोई बाधा न डाली जाए।
उच्च न्यायालय ने सवाल उठाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी है, तो एमएससी नर्सिंग को इससे अलग क्यों रखा गया। न्यायालय ने इस पर भारतीय नर्सिंग परिषद से स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
