उच्चतम न्यायालय ने धूलिया समिति को केरल में दो कुलपतियों के लिए एक-एक नाम प्रस्तुत करने का दिया निर्देश

नयी दिल्ली, 11 दिसंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया समिति को केरल के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच दो विश्विद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में हुए सभी पत्राचार की जांच करने के बाद प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए एक-एक नाम की सिफारिश करने का निर्देश दिया है। शीर्ष न्यायालय का यह निर्देश केरल सरकार और राज्यपाल के बीच राज्य के दो विश्वविद्यालयों में नियमित कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर चल रहे लंबे गतिरोध के बीच आया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने आदेश दिया कि समिति अपनी सिफारिशें अगले बुधवार तक एक सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करे जिसके बाद इस मामले पर 18 दिसंबर को फिर से सुनवाई होगी। यह मामला एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और डिजिटल विज्ञान नवाचार एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित है। शुरुआत में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने राज्यपाल (कुलाधिपति के रूप में) द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए गोपनीय जवाब को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश की। लेकिन पीठ ने पत्र खोलने या उसकी जांच करने से मना कर दिया।

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा कि इसे मत खोलिए, हम इस मामले में नहीं पड़ेंगे। केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने अदालत से कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल डॉ. सिज़ा थॉमस के नाम पर आपत्ति व्यक्त की है और अन्य अनुशंसित उम्मीदवारों पर कोई सवाल नहीं उठाया है। अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि कार्यवाहक कुलपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान श्री थॉमस ने विश्वविद्यालय के कामकाज को पूरी तरह से बाधित कर दिया था। न्यायालय ने हालांकि पाया कि धुलिया समिति ने स्वयं उनका नाम चयनित किया था, जिसके बाद श्री गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सूची योग्यता के क्रम में नहीं बनाई गई थी और वरीयता का अंतिम क्रम मुख्यमंत्री द्वारा अदालत के 18 अगस्त के आदेश के अनुसार दिया जाना था। शीर्ष अदालत ने अपनी असंतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा, “बेहतर प्रयासों के बावजूद गतिरोध जारी है। कुलाधिपति और मुख्यमंत्री किसी सहमति पर नहीं पहुंचे हैं। पत्रों के आदान-प्रदान के अलावा कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।”उच्चतम न्यायालय ने आगे कहा कि अब वह धुलिया समिति पर भरोसा करेगी कि वह आदान-प्रदान किए गए पत्रों की जांच करे और प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए एक एक उम्मीदवार के नाम की सिफारिश प्रस्तुत करे।

यह विवाद नियमित कुलपतियों की नियुक्ति हेतु राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच असहमति से उपजा है। कुलाधिपति ने डॉ. सिज़ा थॉमस और डॉ. प्रिया चंद्रन की नियुक्ति को प्राथमिकता दी है जबकि राज्य सरकार ने डॉ. थॉमस को शामिल करने का विरोध किया है। इससे पहले, शीर्ष न्यायालय ने धुलिया समिति की सिफारिशों के बावजूद देरी करने के लिए राज्यपाल की आलोचना की थी। अदालत ने कुलाधिपति को मुख्यमंत्री द्वारा दी गई वरीयता क्रम के अनुसार नियुक्तियां करने का निर्देश दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि नियमित नियुक्तियां होने तक राज्यपाल अस्थायी कुलपतियों की पुनः नियुक्ति कर सकते हैं। यह मामला राज्यपाल द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका से संबंधित है, जिसमें उन्होंने केरल उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें राज्य सरकार की सिफारिश के बिना की गई अस्थायी कुलपति की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था।

केरल उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 13(7) के अंतर्गत, कुलाधिपति राज्य सरकार की सिफारिश पर ही अस्थायी कुलपति की नियुक्ति कर सकते हैं और वह भी छह महीने तक की अवधि के लिए उससे ज्यादा नहीं। डॉ. के. शिवप्रसाद और डॉ. सिज़ा थॉमस की नवंबर 2024 में अस्थायी कुलपति के रूप में हुई नियुक्तियों को उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 19 मई को रद्द कर दिया था और इस फैसले को खंडपीठ ने बरकरार रखा था। समिति की गोपनीय सिफारिशें प्राप्त होने के बाद उच्चतम न्यायालय 18 दिसंबर को इस मामले पर पुनर्विचार करेगा।

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