हाय मार डाला रे में प्रेम और परिवार के रिश्तों की सजीव प्रस्तुति

भोपाल: मैं गूंगी होने को तैयार हूं मुझे पंख लगा दो, यह लाइन है मंगलवार शाम प्रस्तुत नाटक ’हाय मार डाला रे’ की। रवींद्र भवन में मंगलवार शाम द बेक बेंचर्स मुंबई द्वारा नाटक की प्रस्तुति दी गई। नाटक में कलाकारों का अभिनय दर्शकों को भावनाओं और हास्य के ऐसे सफर पर ले गया। जिसे सभी ने हंसते मुस्कुराते और भावुकता के साथ समझा।कहानी की शुरुआत बाबा पंजर की दुकान से होती है जहां साइकिल पंचर बनवाते हुए नायक और नायिका की मुलाकात होती है।

ऑरेंज गोली खाने और हल्की बातचीत से शुरू हुआ संवाद धीरे धीरे प्रेम में बदलता है। साइकिल संग चलने वाले छोटे छोटे दृश्यों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। वहीं नाटक के दूसरे हिस्से में लेखक ने प्रेमी और प्रेमिका दोनों परिवारों के दृश्य को वास्तविकता से जोड़ने का प्रयास किया है। नाटक में प्रेम और पारिवारिक दबाव के बीच होने वाला संघर्ष बड़ी खूबसूरती से उभरते हुए दिखा। एक ओर मंच पर कलाकारों के सहज अभिनय ने पात्रों को जीवंत कर दिया। तो वहीं दूसरी ओर कलाकारों की चुटकुली बातों ने दर्शकों को खूब हंसाया।

नाटक ने वर्तमान परिदृश्यों के कुछ विषयों को उकेरते हुए ये दिखाया कि हर प्रेम कहानी का अंत परियों वाली किताबों जैसा नहीं होता। कई बार सरल मुलाकातें कठिन मोड़ों तक पहुंच जाती हैं। जिसमें प्रेमी युगल के खिलाफ जाने वाले परिवारों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। नाटक के अंतिम दृश्यों ने दर्शकों को भावुक किया। साथ ही प्रेमी युगल की एक भयावह सोच को भी दिखाया। नाटक के अंत में दर्शकों ने प्रस्तुति को खूब सराहा और कलाकारों के ऊर्जा की प्रशंसा की।

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