भोपाल: रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में सोमवार शाम प्रस्तुत नाटक पुरुष ने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया। के जी त्रिवेदी की स्मृति में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य और सम्मान समारोह के तहत यह प्रस्तुति हुई। नाटक के माध्यम से समाज में स्त्री और पुरुष के बीच असमानता, दलित और ब्राह्मण महिला के साथ हुए अत्याचार और व्यवस्था की खामोशियों को बेहद प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा गया।
नाटक का लेखन जयवंत दलवी द्वारा किया गया। परिकल्पना और निर्देशन आदर्श शर्मा चिंटू ने किया। मंच पर त्रिकर्षि नाट्य संस्था के कलाकारों ने पूरी मजबूती के साथ पात्रों को जिया। कहानी की नायिका अंबिका समाज की उस पीड़ा को दर्शाती दिखी, जिसमें स्त्री पर विपरीत परिस्थिति आने पर उसके अपने ही लोग साथ छोड़ देते हैं। उसके संघर्ष में न माता पिता साथ आते हैं न व्यवस्था का भरोसा मिलता है और न समाज की आवाज उठती है।
नाटक के कई दृश्यों ने दलित महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार की सच्चाई को उजागर किया। इन घटनाओं पर राजनीतिक मंचों की जाति के नाम पर उठती आवाज और न्याय व्यवस्था में उनका महत्व दर्शकों को असहज कर गया। वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण महिला के साथ हुए अन्याय को मिलती शून्य प्रतिक्रिया और जातिगत राजनीति करने वाले समाज के नेताओं की छवि दिखाता हुआ नजर आया।
नाटक ने दिखाया कि जाति के आधार पर महिलाओं के दर्द और न्याय की भाषा किस तरह बदल जाती है। मंचन के दौरान अंबिका के संघर्ष और समाज की उपेक्षा से जुड़े दृश्य इतने मार्मिक थे, कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। प्रस्तुति ने यह भी रेखांकित किया कि समाज आज भी पौरुषीय अहंकार के बोझ तले झुका हुआ है और स्त्री अस्मिता को अक्सर पीछे धकेल दिया जाता है।
नाटक पुरुष केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की कठोर वास्तविकताओं का दर्पण बनकर सामने आया। प्रस्तुति ने यह सवाल खड़ा किया कि स्त्री के अधिकार और न्याय की उम्मीद आज भी जाति और राजनीतिक सुविधा के हिसाब से क्यों बदल जाती है। यह नाटक दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ गया।समारोह में अभिनेता यशपाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्हें इस वर्ष का वरिष्ठ रंगकर्मी सम्मान प्रदान किया गया। जिसे उन्होंने थियेटर कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
