डीजीसीए में खाली पड़े हैं 49 प्रतिशत पद, मंत्री बोले कामकाज पर असर नहीं

नयी दिल्ली, 08 दिसंबर (वार्ता) देश के विमानन क्षेत्र में नियमन के लिए जिम्मेदार नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) में 49 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि इससे कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सोमवार को एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि डीजीसीए में कुल 1,630 पद स्वीकृत हैं जिनमें 794 (49 प्रतिशत) खाली पड़े हैं। इसके अलावा, विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएस) में 598 स्वीकृत पदों में से 203 रिक्त हैं।
सरकार के जवाब में कहा गया है कि देश भर में सरकारी हवाई अड्डों के प्रबंधन और भारतीय हवाई सीमा में एयर नेविगेशन की सेवा प्रदान करने वाले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) में 25,730 स्वीकृत पदों में से 9,771 खाली हैं। सभी हवाई अड्डों पर हवाई यातायात नियंत्रण के लिए जिम्मेदार एटीसीओ (एटीसी अधिकारियों) के कुल 5,537 पद स्वीकृत हैं। इनमें भी 1,260 पद खाली पड़े हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में कहा, “(कर्मचारियों/अधिकारियों) की कमी की वजह से डीजीसीए का कामकाज प्रभावित नहीं हो रहा है। …एटीसीओ के रिक्त पदों के कारण विमानन सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।” उन्होंने सदन को बताया कि डीजीसीए ने पिछले तीन साल में 441 पद सृजित किये हैं। रिक्तियों को भरने के लिए उठाये गये कदमों के तहत पिछले चार महीने में 22 अधिकारी डीजीसीए में शामिल हुए हैं और 42 अधिकारियों को विभागीय पदोन्नति दी गयी है।
इनके अलावा 62 तकनीकी अधिकारियों, पांच फ्लाइट ऑपरेटर इंस्पेक्टरों और आठ स्टेनोग्राफरों का चयन पूरा हो चुका है जबकि 121 परिचालन अधिकारियों के चयन के लिए परीक्षा हो चुकी है।
रिक्तियों के कारण गिनाते हुए श्री नायडू ने कहा कि इसमें विज्ञप्ति पर पर्याप्त आवेदन न आना, चयनित उम्मीदवारों का ज्वाइन न करना और प्रतिनियुक्ति के विज्ञापन पर समुचित आवेदन न आना शामिल हैं। ऐसे में कर्मचारियों को अल्पावधि निविदा पर भर्ती करने के प्रयास किये जा रहे हैं।
श्री मोहोल ने बताया कि साल 2025 में अब तक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के 19 मामलों पर कार्रवाई की गयी है। पिछले साल यह संख्या 22 थी जबकि उससे पहले 2023, 2022 और 2021 में यह संख्या क्रमशः 10,सात और दो रही थी।
उन्होंने बताया कि प्रमुख उल्लंखनों में सांस की जांच (अल्कोहल की मात्रा के लिए) में विफल रहना, फ्लाइट डाटा मॉनिटरिंग का अनुपालन न करना, कॉकपिट में अनाधिकार प्रवेश और आंतरिक तथा गुणवत्ता अश्योरेंस ऑडिट की कमी से संबंधित हैं। दोषियों पर समुचित कार्रवाई की जाती है।

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