
भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पत्रकार वार्ता में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर गम्भीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने “सच बोलकर” प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जर्जर स्थिति को उजागर किया है। पटवारी के अनुसार, मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि मध्य प्रदेश के 50 लाख से अधिक बच्चों ने सेब जैसे साधारण फल का नाम तक नहीं सुना—जो स्कूलों की दुर्दशा और गहराते संकट का संकेत है।
पटवारी ने राष्ट्रीय एजेंसियों और शोध संस्थानों की उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें शिक्षा, पोषण, गरीबी और बाल कल्याण से जुड़े गंभीर आंकड़े वर्षों से सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया की पड़ताल और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा “कागज़ की थाली” में परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन के वीडियो साझा करने से यह स्पष्ट होता है कि बुनियादी सेवाएं चरमराकर ढह चुकी हैं। “यह प्रशासनिक चूक नहीं, पूरे शासन ढांचे की विफलता है,”उन्होंने कहा।
उन्होंने सरकार पर “विकृत प्राथमिकताओं” का आरोप लगाते हुए कहा कि आधिकारिक दस्तावेज़ों में एक बच्चे के पोषण पर प्रतिदिन 12 रुपये दिखाए जाते हैं, जबकि पशुओं के चारे पर 40 रुपये प्रतिदिन का प्रावधान दर्शाया गया है। “इसके बावजूद बच्चे और पशु दोनों कुपोषित हैं। यह सरकार कागज़ संभालती है, ज़िंदगियां नहीं,” पटवारी ने तंज कसा।
सबसे चिंताजनक तथ्य, पटवारी ने कहा, UDISE+ डेटा में सामने आता है—2017–18 में 1.6 करोड़ रहे स्कूल छात्रों की संख्या 2024–25 में घटकर 1.04 करोड़ रह गई है। यानी 56 लाख बच्चे स्कूल तंत्र से गायब हो गए। उन्होंने पूछा, “ये बच्चे कहां गए? क्या वे मजदूरी में धकेल दिए गए, बाल विवाह का शिकार हुए, या सिस्टम पर भरोसा ही खत्म हो गया?”
पटवारी ने यह भी सवाल उठाया कि जब सात वर्षों में स्कूल शिक्षा बजट 7,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 37,000 करोड़ रुपये हो गया है, तब भी मध्याह्न भोजन अपर्याप्त क्यों है, हजारों स्कूलों में प्राचार्य क्यों नहीं हैं, और 1,400 से अधिक स्कूल एकल शिक्षक पर क्यों निर्भर हैं?
स्थिति को “उपेक्षा और भ्रष्टाचार का महाघोटाला” बताते हुए पटवारी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रधान की टिप्पणी ने भाजपा सरकार की पोल खोल दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की और पूछा कि क्या सरकार इन अनियमितताओं पर CBI या ED जांच कराएगी।
पटवारी ने कहा, “यह राजनीति नहीं है। यह 56 लाख बच्चों के भविष्य का प्रश्न है। अब खामोशी चलने वाली नहीं।”
