नयी दिल्ली 4 दिसंबर (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के हितों को नजरंदाज करने के तृण मूल कांग्रेस (टीएमसी) के आरोपों को गुरुवार को संसद में जोरदार तरीके खारिज करते हुए कहा कि यह टीएमसी सरकार ही है जो राज्य के लोगों को नुकसान पहुंचा रही है।
वित्त मंत्री ने सिगरेट पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन ) विधेयक 2025 पर राज्य सभा में चर्चा के दौरान टीएमसी के सदस्यों द्वारा केंद्र पर मनरेगा कोष और अन्य योजनाओं का पैसा रोकने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की नीति-रीति के चलते पश्चिम बंगाल से उद्योग पलायन कर रहे हैं। श्रीमती सीतारमण के जवाब के दौरान टीएमसी के सदस्यों ने जाेरदार हंगामा किया। वित्तमंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को यथा रूप पारित करने के उनके प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर उसे लोक सभा को लौटा दिया। लोक सभा में इसे बुधवार को पारित किया गया था।
श्रीमती सीतारमण ने चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों , खास कर टीएमसी की ओर से उठाए गए मुद्दों का जवाब देते हुए कहा, ” पश्चिम बंगाल को इस सरकार ने कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया है। असल में, यह टीएमसी सरकार है जो पश्चिम बंगाल के लोगों की ग्रोथ (वृद्धि) को नुकसान पहुंचा रही है।”
उन्होंने 2019 में आयुष्मान भारत स्कीम से नाम वापस लेने के तृणमूल सरकार के फैसले का उल्लेख करते तहुए सवाल किया , “क्या यह बंगाल के लोगों के लिए अच्छा है?”
वित्तमंत्री ने कहा , ‘ इंडस्ट्रीज़ पश्चिम बंगाल छोड़ रही हैं। अप्रैल 2011 से 30 सितंबर 2025 तक, 448 लिस्टेड कंपनियाँ और 6,447 अनलिस्टेड कंपनियाँ राज्य से बाहर हो चुकी हैं।’
अपनी इन टिप्पणियों पर टीएमसी दस्यों के हंगामे के बीच श्रीमती सीतारमण ने कहा कि 2014 से, पश्चिम बंगाल को केंद्रीय कर में हिस्से के तौर पर 5.94 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं – जो 2004-14 के दौरान दिए गए 1.34 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 4.4 गुना ज़्यादा है।
उन्होंने कहा कि राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत, 50 साल के ब्याज मुक्त त्रण के तौर पर 24,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय योजना के तहत एम्स कल्याणी , ग्यारह नये मेडिकल कॉलेजों को मंज़ूरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने रेलवे, हाईवे ओर हवाई अड्डों के विकास के लिए राजग सरकार द्वारा किये गये कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को 2025-26 के लिए 13,955 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेलवे बजट मिला, जो 2009-14 के दौरान राज्य पर रेलवे के लिए औसत वार्षिक 4,380 करोड़ रुपये के खर्च से तीन गुना से भी ज़्यादा है।पश्चिम बंगाल में 3,847.5 करोड़ रुपये की लागत से 101 अमृत स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
1,650 किलो मीटर रेलवे लाइनों का बिजलीकरण किया गया है – जिससे पश्चिम बंगाल में कुल बिजलीकरण 98 प्रतिशत से ज़्यादा हो गया है। राज्य में अप्रैल 2014 से 2,300 किलो मीटर से ज़्यादा लम्बाई के राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है।
उन्होंने पिछले साल अगस्त सिलीगुड़ी में बागडोगरा एयरपोर्ट के विकास की 1,549 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी का भी उल्लेख किया।
श्रीमती सीतारमण ने टीएमसी सांसद सागरिका घोष के इस दावे का भी खंडन किया कि केंद्रीय सड़क अवसंरचना कोष (सीआरआईएफ) का पैसा राज्यों को अंतरित नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने आंकड़ों का हवाला दते हुए कहा कि 2024-25 के संशोधित बजट अनुमान और 2025-26 के बजट अनुमान के अनुसार केंद्र सरकार ने 2002-03 से अब तक सीआरआईएफ के तहत 13.25 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किये हैं जबकि इस दौरान सड़क एवं अवसंरचना उपकर के माध्यम से राजस्व संग्रह 12.62 लाख करोड़ रुपये ही जुटे थे।
पश्चिम बंगाल सरकार को मनरेगा के पैसे में के उपयोग में गड़बड़ी के लिए उत्तरदायित्व ठहराते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा , ” महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनिमय (एमजीएनआरईजीए) 2005 के अनुसार, स्कीम को लागू करने में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व पक्का करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीमों ने राज्य में मनरेगा योजना के कार्यान्वयन की जांच में दिक्कतों की रिपोर्ट दी थी। वित्त मंत्री ने कहा, ‘ ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य को उन्हें ठीक करने के लिए कई पत्र भेजे हैं। लेकिन, राज्य में कोई खास सुधार नहीं देखा गया।
इसके चलते, केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन न करने की वजह से एक्ट के सेक्शन 27 के तहत मार्च 2022 से पश्चिम बंगाल को फंड देना बंद कर दिया गया।”
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल राज्य ने 4 ज़िलों में केंद्रीय टीमों द्वारा पहचाने गए 4.81 करोड़ रुपये के रिकवरी (वसूली) के मामलों के पूरी होने की जानकारी 11 जुलाई 2025 की की एक ताजा एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) के ज़रिए दी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार ने अब इस मामले में की गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति की भी जानकारी दी है जो अपने आप में मनरेगा कोष के गलत इस्तेमाल की बात मानता है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 11 नवंबर 2025 के एक पत्र के जरिए राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह राज्य के कुल ज़िलों के बारे में की गयी कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) दे, जिसमें गबन किए गए धन की वसूली ,अनुशासनात्मक कार्रवाई, आपराधिक मामला दर्ज करने के कदम और राज्य द्वारा किए गए दूसरे सभी सुधार के उपायों की जानकारी शामिल हो।
श्रीमती सीतारमण ने यह भी कहा कि 2006-07 से 2013-14 तक पश्चिम बंगाल को मनरेगा के तहत केंद्रीय कोष से 14,985 करोड़ रुपये जारी किये गये थे। इसके विपरीत 2014-15 से 2021-22 के बीच राजग सरकार के इतने ही लम्बे कार्यकाल में राज्य को 54,416 करोड़ रुपये जारी किये गये जो 261 प्रतिशति की बढ़ोतरी दर्शाता है।
चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे जहां राजस्व वसूली का प्रयास बताते हुए विधेयक की आलोचना की, वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे जन स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि दुनिया में 80 देश सिगरेट की कीमतों को निरंतर बढ़ाते रहते हैं ताकि इसके उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के सिगरेट महंगाई सूचकांक के मानकों के अनुसार इस पर कर एवं शुल्क की दरों में संशोधन करता है।
इस विधेयक का उद्देश्य केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 में संशोधन करना है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद उसके तहत तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत की दर से राजस्व क्षतिपूति उपकर लगाया गया था और उसके कारण इन पर उत्पाद शुल्क काफी कम कर दिया गया था।
जीएसटी परिषद की सितंबर में 56वीं बैठक में इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में व्यापक सुधार करने के साथ साथ विलासिता की वस्तुओं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर लगाने वाले 28 प्रतिशत के उपकर के प्रावधान को समाप्त करने का निर्णय किया किया गया। ऐसे में केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन के जरिये इन पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है ताकि ये सस्ते न हो जाएं।
वित्त मंत्री सीतारमण ने विधेयक पर चर्चा के जवाब में कहा कहा कि दुनिया के 80 देशों में सिगरेट पर कर की दरें जन स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को देखते हुए निरंतर बढ़ायी जाती है ताकि सिगरेट सस्ता न हो। भारत भी इसके मूल्य निर्धारण में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुसार बढ़ाया जाता है ताकि सिगरेट खरीदना सस्ता न पड़े।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बीड़ी मजदूरों के हित को देखते हुए इस पर कर भार में वृद्धि नहीं की है। उन्होंने बीड़ी पर जीएसटी को घटा कर 18 प्रतिशत किये जाने के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जीएसटी परिषद की 56 बैठक के फैसले के अनुसार 28 प्रतिशत क्षतिपूर्ति उपकर की दर समाप्त करने के बाद इसे 18 प्रतिशत की दर के दायरे में रखा गया है क्यों कि इसे 40 प्रतिशत की दर में नहीं रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लाटरी पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से बढ़ा कर 40 प्रतिशत इस लिए किया गया है क्यों कि लाटरी को 18 प्रतिशत की दर में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने बीड़ी श्रमिकों के कल्याण की योजनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि दस राज्यों में तम्बाकू किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि आंध प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में बड़ी संख्या में किसाना तम्बाकू की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती करने लगे हैं।
