नई दिल्ली, 04 दिसंबर, 2025: भारतीय मुद्रा रुपया बुधवार को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में पहली बार 90 प्रति डॉलर के नीचे लुढ़क गया। यह 19 पैसे टूटकर 90.15 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो इसका सर्वकालिक निचला स्तर है। विदेशी कोषों की लगातार बिकवाली और IPO OFS के द्वारा पूंजी की निकासी से भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है।
रुपये की कमजोरी का असर दलाल स्ट्रीट से कहीं आगे तक जा रहा है। ईंधन बिल से लेकर ईएमआई, ट्यूशन फीस और ट्रैवल कॉस्ट तक इसका असर दिखेगा। भारत 90% तेल आयात करता है, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, उर्वरक और खाद्य तेल के लिए भी विदेश पर निर्भर है। कमजोर रुपया इन सभी आयातित वस्तुओं को महंगा बना देता है, जिससे औसत भारतीय परिवार प्रभावित होता है।
इस साल आए कुल आईपीओ में ₹1 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि ओएफएस (OFS) के जरिए बटोरी गई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि रुपये में गिरावट को लेकर सरकार चिंतित नहीं है। जानकारों के मुताबिक, आरबीआई की सोच में बदलाव आया है और अब लक्ष्य रुपये को हर कीमत पर एक स्तर पर बचाना नहीं, बल्कि लंबे समय का संतुलन है, जिससे निर्यात स्थिर बना रहे।

