एडस दिवस: सीधी जिले में बढ़ रहे एचआईव्ही मरीज, 617 पॉजिटिव

सीधी। जिले में 18 वर्षों में 617 मरीज एचआईव्ही पॉजिटिव मिले हैं। जिनका नियमित उपचार एआरटी सेंटर रीवा के माध्यम से नि:शुल्क किया जा रहा है। जिला अस्पताल कैम्पस में वर्ष 2007 से संचालित आईसीटीसी केन्द्र में एचआईव्ही जांच की सुविधा उपलब्ध है। गर्भवती महिलाओं की जांच भी केन्द्र में नियमित रूप से हो रही है।

बताते चले कि एचआईव्ही को ह्यूमन इम्यून डिफिशंसी वाइरस के नाम से जाना जाता है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो हमारे इम्यून सिस्टम पर असर करती है। इससे पहले कि इस जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में आएं इसके सामान्य लक्षण का पता लोगों को होना चाहिए। ताकि इसके शुरुआती चरण में ही इसका ईलाज करवा सकें। इसका संक्रमण हो जाने पर इसके कुछ आरंभिक लक्षण भी नजर आने लगते हैं। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लोग एचआईव्ही टेस्ट को लेकर काफी शरमाते हैं। हालांकि आज के समय में एचआईव्ही जांचने के और भी कई तरीके उपलब्ध हैं। एचआईव्ही संक्रमण की शुरुआती जांच बहुत जरूरी होती है। क्योंकि आगे चलकर इससे एड्स जैसी घातक बीमारी हो सकती है। एचआईव्ही के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस फेज में है या यह कितनी गंभीर है। सीधी जिला मुख्यालय में जिला अस्पताल कैम्पस में वर्ष 2007 से संचालित आईसीटीसी केन्द्र में मौजूद आकड़ों के अनुसार 18 वर्षो में 617 मरीज एचआईव्ही पाजिटिव पाये गये है। एचआईव्ही पाजिटिव पाये गये मरीजों का उपचार एआरटी सेंटर रीवा के मार्फत पूरी तरह मुफ्त किया जा रहा है। सीडी 4 के आधार पर मरीजों की दवाईयां शुरू की गई है।

संक्रमण के खतरे में गर्भवती महिलाएं

जांच के दौरान कुछ गर्भवती महिलाओं में भी एचआईव्ही के वायरस मिले है। जिन्हें विशेष निगरानी में उपचार सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। जिला अस्पताल परिसर में स्थिति आईसीटीसी केन्द्र के अलावा गर्भवती महिलाओं की जांच के लिये 12 आईसीटीसी केन्द्र संचालित किये जा रहे है। यह केन्द्र रामपुर नैकिन, चुरहट, सेमरिया, सिहावल, अमिलिया, अमरपुर, खड्डी, मझौली, मड़वास, कुसमी, पोंड़ी, बरिगंवा में संचालित है। आईसीटीसी केन्द्र के मार्फत जिन मरीजों को एचआईव्ही की दवाईयां नियमित रूप से दी जा रही है उनकी आयु ज्यादा हो सकती है। एचआईव्ही के संभावित लक्षण में अगर आपको अचानक अपने वजन में बदलाव महसूस हो या फिर आपको लगे कि आपका वजन सामान्य की तुलना में ज्यादा तेजी से कम हो रहा है तो सावधान हो जाइए। यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है। सूखी खांसी भी एचआईवी का लक्षण है। हो सकता है कि लगे कि खांसी डस्ट एलर्जी के कारण है पर समय के साथ-साथ लगेगा कि स्थिति बदतर होती जा रही है। नाखून या तो टूटने लगते हैं या फिर इसका रंग बदल जाता है।

इनका कहना है

सीधी जिले में एचआईव्ही संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जांच के बाद जो एचआईव्ही संक्रमित चिन्हित होते हैं उनका उपचार जल्द से जल्द निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार शुरू किया जाता है। एचआईव्ही संक्रमण से बचने के लिए लोगों को आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए।

डॉ.अजय प्रजापति, प्रभारी आईसीटीसी केन्द्र सीधी

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