सिरोंज: क्षेत्र में 6 माह के शिशु की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. परिजनों ने क्लीनिक पर लापरवाही का आरोप लगाया. जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया. तथा स्वास्थ्य विभाग एवं राजस्व विभाग की टीम ने क्लीनिक पर पहुंचकर जांच पड़ताल की. जबकि दर्जनों क्लीनिक संचालकों को नोटिस दिए हैं. इस घटना के बाद शहर में अवैध तरीके से संचालित हो रहे क्लिनिकों पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है.
बीएमओ ने बताया कि क्षेत्र के दर्जनों क्लिनिक संचालकों को नोटिस जारी कर क्लीनिक सील भी किया गया. मामले में शिकायत भी दर्ज कराई गई है.जानकारी के अनुसार क्षेत्र के लिधौड़ा गांव निवासी एक व्यक्ति के 6 माह के शिशु हर्षित की गुरुवार को मौत हो गई. परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्होंने शिशु को शहर के एक क्लीनिक पर दिखाया था. जहां पर शिशु का इलाज किया गया था.
परिजनों ने आरोप लगाया कि शिशु के इलाज में लापरवाही बरती गई, जिससे उसकी स्थिति बिगड़ी अब,इलाज संबंधी आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ली जा रही है. वहीं शहर के साथ ही ग्रामीण अंचलों में भी क्लीनिक संचालकों को नोटिस जारी किये जा रहे हैं. वही प्रशासन द्वारा क्षेत्र में क्लीनिक संचालकों पर की जा रही इस कार्यवाही से क्लीनिक संचालकों में हड़कंप की स्थिति है.
इधर, क्लीनिक पर आने पर परिजनों को बच्चे को शासकीय चिकित्सालय ले जाने की सलाह दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि शिशु के इलाज में लापरवाही के चलते उसकी मौत हुई है. जिसके बाद शिकायत पर प्रशासन हरकत में आया. तथा स्वास्थ्य विभाग एवं राजस्व विभाग की टीम ने क्लीनिक पर पहुंचकर जांच पड़ताल की. वही क्लीनिक के आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध ना कराये जाने पर टीम द्वारा क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की गई.
इनका कहना है
इस संबंध में बीएमओ डॉ. पंथी ने बताया कि ग्राम लिधौड़ा
निवासी 6 माह के शिशु हर्षित को मौत के बाद परिजनों ने एक क्लीनिक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया. जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग एवं राजस्व विभाग की टीम द्वारा क्लीनिक पर पहुंचकर जांच पड़ताल की गई है.
क्षेत्र में बड़ी तादाद में संचालित हो रहे अवैध क्लीनिक
सिरोंज शहर एवं ग्रामीण
अंचलों में दर्जनों की तादाद में
क्लीनिक संचालित किया जा रहे
हैं. जहां पर झोलाछाप डॉक्टर
मरीजों की हर तरह की बीमारी
का बेधड़क होकर उपचार कर
देते है. इनके द्वारा मरीजों का
इंजेक्शन लगाने से लेकर मरीज की हर प्रकार की बीमारी का उपचार कर दिया जाता है. जिससे कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती हैं. इनमें से कई क्लीनिक संचालकों के पास पर्याप्त वैध दस्तावेज भी नही है.
संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध ना कराये जाने पर फिलहाल क्लिनिक को सील किया गया है. मामले में शिकायत भी दर्ज कराई गई है. उनहोंने कहा कि मामले में जांच पड़ताल की जा रही है. जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जावेगी.
बावजूद इसके इन क्लीनिकों में मरीज की हर प्रकार की बीमारी का ईलाज कर दिया जाता है. जब एक बार मरीज उनके चंगुल में फंस जाता है, तो यह ईलाज के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूलते है. यह क्लीनिक संचालक अपने क्लीनिकों को वैध बताते हैं. वहीं जब कार्यवाही होती है, तो यह क्लीनिक संचालक क्लीनिकों को बंद कर भाग जाते हैं. यही हर बार किसी घटना के बाद प्रशासन जागता है, तथा कार्यवाही शुरू कर दी जाती है. लेकिन सतत एवं ठोस कार्यवाही की अभाव में क्षेत्र में अवैध क्लिनिक संचालकों के हौसले बुलंद है.
इनका कहना है
इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी हरिशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि प्रशासन द्वारा क्लिनिक को सील किया गया है. मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है. वहीं मर्ग भी कायम किया गया है
