सारनी। सारनी में बिना मान्यता चल रही चिकित्सा गतिविधियों ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार शहर तथा आसपास के ग्रामीण इलाकों में दर्जनों झोला छाप चिकित्सक बिना पंजीकरण एलोपैथिक दवाओं, इंजेक्शन व ड्रिप बोतलों से इलाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के विपरीत, कई स्थानों पर बीएएमएस चिकित्सकों द्वारा भी एलोपैथिक उपचार की शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि इंजेक्शन, आपात उपचार एवं दवा लिखने के लिए एमबीबीएस योग्यता अनिवार्य मानी जाती है।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि कुछ क्लीनिकों में शिशुओं से लेकर वृद्धों तक को ग्लूकोज बोतल, मल्टीविटामिन इंजेक्शन व अन्य दवाएं नियमित रूप से दी जा रही हैं। साथ ही कुछ चिकित्सकों द्वारा स्वयं ही रक्त जाँच कर गंभीर बीमारी बताकर भारी शुल्क वसूलने की बात भी सामने आई है। अनुमान है कि क्षेत्र में 30 से 50 तक अवैध चिकित्सा स्थल संचालित हो सकते हैं।
कुछ माह पूर्व बीएमओ एवं तहसील प्रशासन ने कार्यवाही की थी, परंतु शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थिति में बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ। वहीं सलैया क्षेत्र में मिले नवजात शव के बाद अवैध गर्भपात की आशंका ने स्थिति और गंभीर बना दी है।
इस संबंध में दूरभाष पर चर्चा में कहा।
एलोपैथिक दवा, इंजेक्शन और ड्रिप लगाने का अधिकार केवल एमबीबीएस चिकित्सकों के पास है। चिन्हित केंद्रों पर कार्रवाई के लिए विभाग कार्य जल्द करेगा।
घोड़ा डोंगरी ब्लॉक बीएमओ डॉ संजीव शर्मा
