जबलपुर:कुटुम्ब न्यायालय के प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने क्रूरता साबित पाकर पति-पत्नी के बीच विवाह विच्छेद की अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दंपति के मध्य विवाद अत्यधिक बढ़ जाने, पत्नी द्वारा एफआईआर दर्ज कराने से दोनों के बीच सुलह की संभावना समाप्त हो गई है। स्नेह, भावनात्मक लगाव व सम्मान में कमी आई है।
पत्नी के आचरण से स्पष्ट है कि वह भविष्य में पति के साथ रहने की इच्छा नहीं रखती। पति द्वारा लगाए गए क्रूरता के आरोप में भी सत्यता परिलक्षित हुई है। इसलिए तलाक की मांग पूरी की जाती है।दरअसल आवेदक जबलपुर निवासी दीपक सिंह की ओर से अधिवक्ता योगेन्द्र तिवारी व अर्जव लाल पटेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि दीप्ति राठौर के साथ आवेदक का विवाह 16 जनवरी 2017 को हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। आवेदक मेडिकल कालेज में पदस्थ है। वह अपने माता-पिता के साथ रहता है।
जबकि पत्नी प्राथमिक शिक्षक है और अशोक नगर में पदस्थ है। वह मायके में माता-पिता के साथ निवास कर रही है। ससुराल से पहली विदा के पूर्व महज एक सप्ताह जबलपुर में पति के साथ रही। इसके बाद इंदौर में एक माह किराये के मकान में पति के साथ रही। वापस जबलपुर आकर किराये के मकान में कुछ समय रही, इसी के साथ दोनों अलग हो गए। आवेदक व उसके स्वजनों का आरोप है कि बहु का रवैया प्रताडऩा भरा रहा है। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद अदालत ने उक्त निर्देश दिये।
