जबलपुर: तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के छठवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए मात्र 67 ग्राम वजन का अत्याधुनिक मिनी ड्रोन तैयार किया है। इस उपलब्धि ने संस्थान को गौरवान्वित किया है।
यह ड्रोन पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, अभिकल्प एवं विनिर्माण संस्थान (ट्रिपलआईटीडीएम) जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की रोबोटिक्स प्रतियोगिता के लिए तैयार किया गया था, जिसमें ड्रोन का वजन 100 ग्राम से कम रखना अनिवार्य था। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने चुनौती को अवसर में बदलते हुए हल्के एवं मजबूत मटेरियल का उपयोग कर सफलतापूर्वक ड्रोन तैयार किया और प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार हासिल किया।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र संस्कार चौरसिया ने नवभारत को चर्चा के दौरान बताया कि इस प्रोजेक्ट को अदनान पाटनवाला, हिबा खान, मनसू चौकसे और समीप चौकसे के साथ मिलकर मात्र 25 दिनों में तैयार किया गया है। विद्यार्थियों ने कॉलेज के प्रोफेसरों के मार्गदर्शन और ऑनलाइन रिसर्च के माध्यम से इसकी डिजाइनिंग एवं तकनीकी संरचना विकसित की। साथ ही उन्होंने बताया कि इस ड्रोन की अनुमानित लागत लगभग 6 से 7 हजार रुपये है।
मोबाइल और रिमोट दोनों से नियंत्रित
विशेष रूप से तैयार किया गया यह ड्रोन मोबाइल एवं रिमोट दोनों माध्यमों से संचालित किया जा सकता है। मोबाइल आधारित वाई-फाई कनेक्टिविटी पर इसकी रेंज लगभग 200 से 500 मीटर तक रहती है, जबकि रिमोट कंट्रोल से इसकी उड़ान क्षमता 2.5 से 3 किलोमीटर तक पहुँच जाती है।
आधुनिक तकनीक और सेंसर का उपयोग
ड्रोन में माइक्रो कंट्रोलर, हल्की लेकिन शक्तिशाली बैटरी, प्लास्टिक प्रोपेलर और आधुनिक सेंसर तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें जाइरोस्कोप, एक्सेलरोमीटर एवं बैरोमीटर जैसे सेंसर लगाए गए हैं, जो इसे संतुलित और सुरक्षित उड़ान प्रदान करते हैं। मोबाइल से संचालन के लिए ईएसपी ऐप का उपयोग किया जाता है। वाई-फाई से कनेक्ट होने पर यह सेंसर को सिग्नल भेजता है और सेंसर डेटा के आधार पर ड्रोन नियंत्रित होकर उड़ान भरता है।
