तल्ख टिप्पणी : सभी जगह फंड दे रहे हो, लेकिन हाईकोर्ट को अंतिम स्थान पर रखा

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने जबलपुर में लॉयर्स चैंबर और मल्टी लेवल पार्किंग के लिए भवन निर्माण के लिए बजट आवंटन में देरी के मामले को सख्ती से लिया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि सभी जगह फंड दिया जा रहा है, लेकिन हाईकोर्ट को अंतिम स्थान पर रखा है। युगलपीठ ने सरकार को बजट स्वीकृति पर जल्द निर्णय लेकर बताने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की है।

उल्लेखनीय है कि यह जनहित का मामला मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि उक्त भवन का शिलान्यास 4 मई 2025 को हुआ था। हाईकोर्ट के गेट नंबर-4 के सामने करीब 117 करोड़ रुपए से आधुनिक लॉयर्स चैंबर और मल्टी लेवल पार्किंग बनना है। इसका भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी, जस्टिस एसी शर्मा, जस्टिस सूर्यकांत शर्मा और मध्यप्रदेश के तत्कालीन चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत की मौजूदगी में हुआ था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि इसे लेकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने लगातार राज्य सरकार से पत्राचार किया। शासन की ओर से जवाब दिया गया कि 5 मई 2025 को सैद्धांतिक रूप से वित्त की अनुमति प्राप्त हो चुकी है, केवल व्यावहारिक रूप से वित्त विभाग से अनुमोदन प्राप्त नहीं हुआ है, जिस कारण से निर्माण शुरू नहीं हो पाया। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जब सैद्धांतिक रूप से छह माह पहले अनुमति मिल चुकी है तो वित्तीय स्वीकृति में देरी क्यों लग रही है। यह मामला जनहित से जुड़ा हुआ है क्योंकि पार्किंग सुविधा नहीं होने से हाईकोर्ट के सामने रोजाना जाम लगता है, जिसके चलते राहगीर परेशान होते हैं। मल्टीलेवल पार्किंग बनने से उक्त समस्या से निजात मिलेगी। मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।

Next Post

डिफेंस की जमीन पर अवैध कब्जे को चुनौती

Thu Nov 27 , 2025
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में शहर के छावनी क्षेत्र में डिफेंस की जमीन पर कई लोगों द्वारा अवैध कब्जा किये जाने को चुनौती दी गई है। दायर मामले में कहा गया है कि वर्ष 1992 में 46 कब्जाधारकों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन इनमें से अधिकतर प्रकरणों में अभी […]

You May Like