इंदौर: शहर में यातायात जाम से निजात दिलाने के लिए आईडीए कई फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माण कर चुका है. आईडीए द्वारा शहर के विकास में हर तरह से विशेष भूमिका निभाई जाती है. ऐसा पहली बार हुआ है कि आईडीए से चूक हो गई और एक्सीडेंट जोन के साथ यातायात जाम स्पॉट का भी निर्माण कर दिया है! यह शहर के उज्जैन रोड पर बनेगा!आईडीए बाणगंगा से अरविंदो हॉस्पिटल के बाहर तक 145 करोड़ रुपए की लागत से डबल डेकर ओवर ब्रिज बना रहा है.
डबल डेकर इसलिए कि लव कुश चौराहे पर एमआर 10 से सुपर कॉरिडोर और सुपर कॉरिडोर से एमआर 10 जाने के लिए आईडीए ने तीन तीन लेन चौड़ा ब्रिज बना दिया है. इसके ब्रिज के उपर मेट्रो रेल की लाइन है. मेट्रो लाइन और आईडीए द्वारा ही निर्मित ब्रिज के उपर से डबल डेकर ब्रिज, जिसकी ऊंचाई 75 से 80 फीट के बीच है. यह ब्रिज लवकुश चौराहे पर बाणगंगा से सीधे उज्जैन रोड पर उतरेगा.
आईडीए से ब्रिज निर्माण के बड़ी चूक हो गई है. चूक ऐसी की अरविंदो हॉस्पिटल के छात्र, मरीज और आगे पेट्रोल पंप के पीछे बसी कई कॉलोनियां और अरविंदो हॉस्पिटल के सामने प्राइम सिटी सहित 15 से 20 कॉलोनियों के रहवासियों का आना जाना लगा रहता है. इधर उज्जैन से इंदौर आने जाने वाले और खासकर इंदौर से उज्जैन जाने वाले भारी वाहनों सहित सभी तरह के वाहन डबल डेकर ब्रिज से जो अरविंदो चौराहे पर उतर रहा है, का भी भारी यातायात रहेगा.
यही एक्सीडेंट और चक्काजाम स्पॉट बन गया है. इससे बढ़कर यह है कि डबल डेकर ब्रिज के दोनों ओर सर्विस रोड बहुत सकरी है. वहां से निकलने वाला ट्रैफिक भी अरविंदो चौराहे से ही गुजरेगा। खास कर सुपर कॉरिडोर पर जाने के लिए वाहन चालक को बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी. यह बात पूर्व संभागायुक्त दीपक सिंह ने ब्रिज की दीवाल को लेकर आईडीए इंजीनियरों से पूछा भी था.
इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?
यातायात के जानकार बताते हैं कि डबल डेकर ब्रिज यदि 500 सौ मीटर आगे पेट्रोल पंप को क्रॉस करके उतारा जाता तो ट्रैफिक क्रेश नहीं होता. अभी ही अरविंदो चौराहे पर यातायात जाम की समस्या बहुत बढ़ गई है और ब्रिज शुरू होने के बाद इंदौर से उज्जैन जाने वाले ट्रैफिक से क्या स्थिति बनेगी ? यह तो ब्रिज शुरू पर ही पता चलेगा. सवाल यह है कि आईडीए अधिकारियों से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? सरकारी विभागों में आईडीए ही एकमात्र ऐसी संस्था है, जो हर तरह के नफा नुकसान का अध्ययन करके विकास कार्य करता है.
अब यह हो सकता है
आईडीए की डबल डेकर ब्रिज को लेकर चूक कहे या गलती, मगर ब्लैक स्पॉट यातायात जाम और एक्सीडेंट का तो बन गया है. अब जो हो सकता है, वह यह कि ब्रिज उतरने के साथ स्पीड ब्रेकर बनाए जाना ही रास्ता है, लेकिन उसकी कोई गारंटी नहीं की यातायात जाम नहीं होगा. या दूसरा यह है कि ब्रिज की लंबाई और लागत दोनों बढ़ाकर पेट्रोल पंप के आगे उतारा जाए. दूसरे ऑप्शन की संभावना कम है, क्योंकि उसमें ब्रिज की डिजाइन और लागत 25 करोड़ रुपए तक बढ़ सकती है.
एक्सपर्ट कहते हैं
एक्सीडेंट की संभावना बढ़ेगीः मुदगल
आईडीए के सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री ए.के. मुदगल ने कहा कि ब्रिज उतरते ही स्पीड ब्रेकर बनाना तो गलत होगा. यदि अरविंदो चौराहे से बाणगंगा या एमआर 10 जाने के लिए क्रॉस होगा तो रिस्क हो जाएगी. मेरा मानना है कि आईडीए ने इसका परीक्षण किया होगा. ब्रिज से वहां स्पीड से उतरेंगे, उस स्थिति में एक्सीडेंट होने की संभावना बढ़ जाएगी. ट्रैफिक सिग्नल तो ब्रिज उतरने साथ बनाना गलत है. मेरे हिसाब से सर्विस रोड चौड़ी होने और बीआरटीएस के रेलिंग बनाकर आगे से यू टर्न ही इसका हल हो सकता है.
