कलेक्टर की क्लासरूम में सीख और संवेदना, बच्ची के जवाब पर बोले,लड़की होना अफसोस नहीं, गर्व है

सिंगरौली। कलेक्टर गौरव बैनर सोमवार को बैढ़न स्थित उत्कृष्ट विद्यालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने बच्चों से खुलकर बातचीत की। इस दौरान एक प्रसंग ने पूरे माहौल को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया। कलेक्टर ने एक छात्रा से पूछा– “बड़ी होकर क्या बनना चाहती हो?”

छात्रा ने संकोच भरे स्वर में कहा– “मुझे पावर चाहिए… ताकि लड़की होने का अफसोस खत्म कर सकूं और अपने परिवार की मदद कर सकूं।”

छात्रा का जवाब सुनकर कलेक्टर कुछ सेकंड रुके, फिर बहुत सरल लेकिन प्रभावी शब्दों में बोले— “लड़की होना कभी अफसोस की बात नहीं, यह गर्व की बात है। शक्ति, संवेदना और मेहनत—ये तीनों गुण लड़कियों में स्वभाव से होते हैं। पावर पढ़ाई और आत्मविश्वास से मिलती है, पहचान लिंग से नहीं।” उनकी बातों पर कक्षा में मौजूद बच्चों ने तालियां बजाईं।

कलेक्टर बैनर ने छात्रों को सफलता के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र भी दिए। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति साफ सोच सफलता की सबसे पहली सीढ़ी है। उन्होंने बच्चों को रोजाना पढ़ाई, खेल और रचनात्मक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की सलाह दी।

कलेक्टर ने यह भी कहा कि हर बच्चा अपनी क्षमता के हिसाब से खास होता है, बस जरूरत है खुद पर विश्वास रखने की।

विद्यालय के शिक्षकों ने कलेक्टर की इस पहल को प्रेरणादायक बताया और कहा कि ऐसे संवाद बच्चों की सोच बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं। कलेक्टर की यह अनौपचारिक क्लास छात्रों के लिए एक सीख और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा बनकर सामने आई।

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